Delhi News: रविवार यानी 6 सितंबर का दिन, दिल्ली का सत्य निकेतन इलाके में सबकुछ सामान्य चल रहा था लेकिन, अचानक से सबकुछ बदल गया। कुछ घंटे पहले जहां लोगों की चहलकदमी थी, शांति और खुशहाली थी। वहां अगले कुछ में बर्बादी आ गई। पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद कुल 7 लोगों की जिंदगी चली और उन परिवार को मिला कभी ना भुला पाने वाला दर्द, जिन्हें अपनों को खोया।
सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले अर्पित जाज के पिता की बात सुनकर हर कोई भावुक हो जाएगा। बेटे के खोने के गम वह इस कदर टूट गए हैं कि देशभर के अभिभावकों से अपील कर रहे हैं की अपने बेटे को दिल्ली पढ़ने ना भेजें।
पिता की अभिभावकों से भावुक अपील
अपने 21 वर्षीय बेटे को सत्य निकेतन हादसे में खोने में बाद पिता भूपेंद्र जाज ने अपने बेटे को अंतिम विदाई देते वक्त अभिभावकों से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि मैं सभी माता-पिता से बस यही कहना चाहूंगा कि वह अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली ना भेजें, मैं हताश हो गया हूं। मैं कई कठिनाइयों को पार कर अर्पित को पढ़ा रहा था। उन्होंने बताया कि अर्पित की एक आंख खराब हो गई थी और परिवार ने उसकी दूसरी आंख को दान करने का फैसला लिया है। ताकी किसी जरूरतमंद मरीज की जिंदगी रोशन हो सके।
बुझ गया परिवार का चिराग
अर्पित के दादा माखनलाल जाज ने भावुक होते हुए कहा कि वह हमारे परिवार का चिराग था। हमने हमारा सहारा छिन गया। परिजन के अनुसार, रक्षाबंधन मनाने के बाद अर्पित 6 सितंबर को दिल्ली आया था। परिवार के मुताबिक हादस के बाद अर्पित से संपर्क नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कहा कि सात सितंबर को अर्पित के शव की पहचान हुई। इसके बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए देवास ले आया गया।
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