शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए बरी, पूर्व सीएम हुए भावुक

शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए बरी, पूर्व सीएम हुए भावुक

Arvind Kejriwal Acquitted: दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित कुल 23 लोगों को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में बरी कर दिया। यह मामला जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार द्वारा उपराज्यपाल विनाई कुमार सक्सेना को सौंपी गई रिपोर्ट से जुड़ा था। रिपोर्ट में 2021-22 की दिल्ली एक्साइज नीति (शराब नीति) के निर्माण में कथित प्रक्रियात्मक चूकें बताई गई थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि सिसोदिया ने एक्साइज मंत्री के रूप में “मनमाने और एकतरफा फैसले” लिए, जिससे सरकारी खजाने को 580 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ।

लगाया गया था ये आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि शराब कारोबारियों से मिली “किकबैक राशि” का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेताओं ने विशेष लाभ के रूप में किया, जैसे लाइसेंस शुल्क में छूट, जुर्माना माफ करना, कोविड-19 महामारी के कारण हुई व्यवधान की वजह से राहत आदि। इन फायदों का इस्तेमाल कथित रूप से पंजाब और गोवा में 2022 की विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया।

CBI ने आप नेताओं को किया था गिरफ्तार

दिल्ली की यह शराब नीति नवंबर 2021 में लागू हुई थी, लेकिन जुलाई 2022 में इसे रद्द कर दिया गया। इस मामले में दो केस दर्ज किए गए थे। एक CBI द्वारा और दूसरा ED  द्वारा कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में। CBI केस में अधिकांश शीर्ष AAP नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह शामिल थे।

AAP के नेताओं के खिलाफ ED की जांच

हालांकि, अब CBI केस में सभी आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है, लेकिन ED का मामला अभी भी चल रहा है और उस पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। यह मामला अभी भी विकसित हो रहा है। अदालत और जांच एजेंसियों की नई जानकारी के लिए समय-समय पर अपडेट देखा जा सकता है। इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में हल्की राहत की स्थिति बन गई है, जबकि AAP के नेताओं के खिलाफ ED की जांच और मामले अब भी चुनौतियों से भरे हैं। वहीं, अदालत से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पूरा का पूरा फर्जी केस बनाया गया था। 

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