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भाजपा की लहर या एंटी-इंक्मबेंसी? जानें वो कारण जिसके चलते 15 साल बाद ममता बनर्जी ने गंवाई सत्ता

भाजपा की लहर या एंटी-इंक्मबेंसी? जानें वो कारण जिसके चलते 15 साल बाद ममता बनर्जी ने गंवाई सत्ता

Bengal Election: 4 मई 2026 ये वो तारीख जो टीएमसी आने वाले समय में याद करती रहेगी। ना सिर्फ याद करेगी बल्कि उन सवालों का जवाब भी तलाशने की कोशिश करेगी की भाजपा ने ऐसी कौन सी चाल चली जिसके कारण 15 साल बाद बंगाल की सत्ता से टीएमसी को बेदखल होना पड़ा।

4 मई को जब चुनाव के नतीजे आए, तो टीएमसी के दावे धरे के धरे रह गए। दूसरी तरफ भाजपा को उम्मीद से कहीं ज्यादा सीटें मिलीं। ऐसे में चलिए जानते हैं वो कारण जिसके चलते पश्चिम बंगाल की सत्ता टीएमसी के हाथ से निकल गई।

एंटी-इकम्बेंसी

ममता बनर्जी ने साल 2011 में पहली बार बंगाल में सरकार बनाई थी। तब से लेकर अब 2026 तक यानी 15 साल तक वह मुख्यमंत्री बनी रही लेकिन, 2026 में सत्ता का चौका नहीं लगा सकीं। सत्ता विरोधी लहर ने टीएमसी की नाव को डूबो दिया। भाजपा ने भी करप्शन, हिंसा, भ्रष्टाचार और लॉ एंड ऑर्डर को मुद्दा बनाया। जिसके फायदा भाजपा को चुनाव मिला।

हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि ममता बनर्जी 15 साल से अगर सत्ता में काबिज है, तो उसमे सबसे बड़ा रोल मुस्लिम वोटरों का है। मुस्लिम मतदाता एकतरफा टीएमसी को वोट करते हैं। फिर क्या था भाजपा ने सालों पहले से हिंदू वोटरों को एकजुट करने का प्रयास किया और 2026 के चुनाव में ये देखने को मिला। शुवेंदु अधिकारी का भी दावा है कि इस बार हिन्दुओं ने खुलकर भाजपा को वोट दिया। 

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महिलाओं को भाजपा ने साधा

भाजपा ने विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों को अपने पक्ष किया। भाजपा ने संदेशखाली, मुर्शिदाबाद जैसी घटनाओं को मुद्दा बनाकर चुनाव प्रचार में टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाया। जिसके कारण माना जाता है कि महिलाओं ने खुलकर भाजपा का समर्थन किया।

घोटले के आरोप में घिरी टीएमसी

भाजपा ने इस चुनाव में बढ़ती बेरोजगारी, भर्ती घोटाले, भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। दूसरी तरफ 26 हजार शिक्षकों की भर्ती रद्द होने के कारण टीएमसी के प्रति लोगों में गुस्सा था। इस भी भाजपा ने मौके की तरह भुनाया। राज्य कर्मचारी लंबे समय से सातवें वेतन आयोग लागू करने की मांग कर रहे हैं। ये भी एक कारण रहा जिससे चलते टीएमसी को करारी हार मिली है। 

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