Bihar News: बिहार के भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में हर वर्ष शिवभक्ति के अनेक प्रेरक और अनोखे स्वरूप देखने को मिलते हैं। इस वर्ष कच्ची कांवरिया पथ पर एक ऐसी भावनात्मक यात्रा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है, जिसमें एक पिता अपनी मात्र दो माह की पुत्री को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं।
मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2025 में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के दौरान उन्होंने पुत्री रत्न की प्राप्ति की मनोकामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म होगा, तो अगली श्रावणी यात्रा में वे अपनी पुत्री को साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार पहुंचेंगे।
वर्ष 2026 में उनकी मनोकामना पूरी हुई और उनके घर बेटी का जन्म हुआ। अब वे अपने संकल्प को पूरा करने के लिए दो माह की नन्ही बेटी को डोली में बैठाकर कठिन दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उनकी डोली को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यात्रा के दौरान बच्ची को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसमें पंखा, प्रकाश व्यवस्था तथा सोलर ऊर्जा से संचालित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
अनोखी डोली का बनी चर्चा का विषय
मिथिलेश कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से एक पुत्र है, लेकिन बेटी के जन्म ने उनके परिवार को पूर्णता प्रदान की है। वे अपनी इस यात्रा के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि बेटियां परिवार का गौरव हैं और उनका सम्मान समाज की जिम्मेदारी है। कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय श्रद्धालु इस अनोखी डोली को देखने के लिए रुक जाते हैं। लोग पिता की अटूट आस्था के साथ-साथ अपनी बेटी के प्रति उनके स्नेह और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।
श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति सम्मान का यह अनूठा उदाहरण
यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि “बेटी सम्मान” और “बेटी है अनमोल” जैसे सामाजिक संदेश को भी सशक्त रूप से जन-जन तक पहुंचा रही है। श्रद्धा, संकल्प और बेटी के प्रति सम्मान का यह अनूठा उदाहरण श्रावणी मेले की प्रेरणादायक सफल कहानियों में शामिल हो गया है।