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'युवाओं को शांत रहने की जरूरत' CJP विरोध-प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

'युवाओं को शांत रहने की जरूरत' CJP विरोध-प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Supreme Court:सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि युवाओं के साथ सख्ती से पेश आने के बजाए उन्हे समझाना और उनसे बातचीत करना आवश्यक है। सीजेआई ने कहा कि अगर भटके हुए युवा पत्थरबाजी भी कर दें, तब भी उन्हें सलाह और काउंसलिंग की जरूरत होती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार बहुत सख्ती या आक्रामक रवैया अपनाएगी, तो समाज में तनाव फैल सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सुनने और समझने की जरूरत है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति को कैसे संभालना है, वह आपसे और हमसे बेहतर जानते हैं।

कोर्ट में क्या हुआ

याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी की तरफ से पेश वकील रिजवान अहमद ने कहा कि पंद्रह हो गए हैं, आयोजकों की जवाबदेही क्या है? वह चैनल पर भड़काऊ बयान दे रहे हैं।

वकील ने तर्क दिया कि सरकारों को प्रदर्शनकारियों की बात मानने के लिए 'हद से ज्यादा नहीं झुकना चाहिए'। एक युवा की मौत हो गई। अगर दिल्ली से जुड़े मामलों में हद से ज्यादा झुकती है, तो क्या इससे राजस्थान में मिसाल कायम नहीं होगी?

कल को अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेजों की मांग हो और बसों पर पत्थर फेंकने लगें, तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी हद से ज्यादा झुक जाएगी?

वकील ने कहा कि पत्थरबाजी में शामिल लोगों को सिर्फ इसलिए नहीं राहत मिलनी चाहिए क्योंकि सरकार गलत स्थिति में थी।

उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक मिसाल दी जा रही है। 3 साल पहले किसान सिंघु बॉर्डर पर थे। कल जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा आएगी।

संसद लोकतंत्र का मंदिर है और कहा कि अगर 500 लोग परिसर में घुस गए थे, तो कैसे पता चलेगा कि उनके पास देसी बंदूक थी या नहीं?

उन्होंने कहा कि क्या होता अगर गोली चला देते? वह किसी नेश्नल हाईवे पर मार्च नहीं कर रहे थे। वह संसद की तरफ मार्च कर रह थे। हर किसी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 

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