Dharmendra Pradhan Resignation: लगभग एक महीने से देशभर में NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी था। इस आंदोलन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। अब धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपना आंदोलन खत्म करेगी या बाकी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रहेगा। NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत सामने आने के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि अगले साल से NEET परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराई जाएगी।
दोबारा परीक्षा कराना काफी नहीं- CJP
हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों और CJP का कहना था कि सिर्फ दोबारा परीक्षा कराना काफी नहीं है। उनका कहना था कि इस मामले में जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी वजह से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई। पिछले कुछ दिनों में सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने भी आंदोलनकारियों से मुलाकात की। CJP का दावा था कि सरकार उनकी कुछ मांगों पर सकारात्मक है। इनमें पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दे शामिल थे। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हो रहा था।
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया शेयर किया इस्तीफा पत्र
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पत्र साझा किया। उन्होंने लिखा कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद से बड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिकायत मिलते ही सीबीआई जांच कराई, दोबारा परीक्षा कराई और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखना सबसे जरूरी है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
CJP की सबसे बड़ी मांग हुई पूरी
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा CJP की सबसे बड़ी मांग को पूरा करता है। हालांकि संगठन की अन्य मांगें अभी भी बाकी हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार, पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग शामिल है। अब सभी की नजर CJP के अगले फैसले पर है। देखना होगा कि संगठन इस इस्तीफे को अपनी जीत मानकर आंदोलन खत्म करता है या बाकी मांगों पर सरकार से लिखित आश्वासन मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखता है। फिलहाल इतना साफ है कि आंदोलन की सबसे बड़ी मांग पूरी होने के बाद देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक नया मोड़ आ गया है।
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