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मिडिल ईस्ट की टेंशन और गैस किल्लत के बीच सरकार ने लागू किया ECA, रोजर्मरा की जरूरतों से जुड़ा है नियम

मिडिल ईस्ट की टेंशन और गैस किल्लत के बीच सरकार ने लागू किया ECA, रोजर्मरा की जरूरतों से जुड़ा है नियम

The Government Implemented ECA: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव ने वैश्विक स्तर पर भूचाल ला दिया है। तेल और ईंधन की वजह से विश्व भर में भूचाल मचा हुआ है। इधर केंद्र सरकार ने भी मंगलवार यानी 10 मार्च को बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act लागू कर दिया है। इस एक्ट के तहत रोजमर्रा की चीजों की सप्लाई सुचारू रूप से बनाए रखना है।

इस एक्ट के तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को एलपीजी के उत्पादन बढ़ाने और कुछ खास हाईड्रोकार्बन को एलपीजी बनाने के लिए इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिरकार ईसीए क्या है, इसे लागू होने के बाद क्या बदलाव होगा

क्या है ECA ?                            

दरअसल, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 भारत सरकार का एक कानून है। जिसके तहत जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रण किया जाता है। इसका उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी को रोककर उचित दाम पर आवश्यक सामान को उपलब्ध करना सुनिश्चित करना है। इसके तहत सरकरा स्टॉक सीमा तय कर सकती है। अधिनियम के मुताबिक, सरकार को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार है, जो कि आर्थिक संरक्षण अधिनियम 1955 के अंतर्गत आता है।

केंद्र सरकार ने 2017 में इस अधिनियम में कई चीजों को जोड़ा था। जिसमें ड्रग्स, उर्वरक, खाद्य पदार्थ, कपास से बना हैंक यार्न, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद, कच्चा जूट,जूट वस्त्र और कई तरह के बीज - सब्जियां शामिल हैं।

सरकार ने और क्या आदेश दिए

सरकार ने आदेश दिया है कि रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल प्लांट गैसों का उपयोग अब पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट या दूसरे औद्योगिक कामों के लिए नहीं कर पाएंगे। यानी इन गैसों को सीधे एलपीजी बनाने में ही लगाया जाएगा। ताकि घरों में रसोई गैस की किल्लत ना हो। साथ ही सरकार का कहना है कि एलपीजी भारतीय घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक जरूरी ईंधन है, इसलिए इसकी उपलब्धा जरूरी है। 

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