
Nari Shakti Vandan Act: महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार अब विपक्षी दलों से चर्चा कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस कानून में संशोधन करने के प्रस्ताव पर विपक्ष के विचार जानना चाहती है, ताकि महिलाओं को आरक्षण जल्दी लागू किया जा सके। महिला आरक्षण बिल, जिसे आधिकारिक तौर पर “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” कहा जाता है, संसद के विशेष सत्र में सितंबर 2023 में पारित किया गया था। यह संविधान के 106वें संशोधन के रूप में लागू किया गया। इस कानून के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण दिया जाएगा।
कानून में क्या है शर्त?
हालांकि इस कानून में एक शर्त भी रखी गई है। इसके मुताबिक महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब कानून लागू होने के बाद पहली जनगणना होगी और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। परिसीमन में नई जनसंख्या के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं। माना जा रहा है कि अगली जनगणना 2027 में हो सकती है और उसके बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में मौजूदा नियमों के तहत महिला आरक्षण लागू होने में काफी समय लग सकता है।
कानून में बदलाव की संभावना
जानकारी के अनुसार इसी देरी को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब कानून में बदलाव की संभावना तलाश रही है। सरकार ने अनौपचारिक रूप से विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की है, ताकि यह देखा जा सके कि क्या किसी संशोधन के जरिए महिलाओं को आरक्षण पहले लागू किया जा सकता है। दरअसल, विपक्षी दलों की शुरुआत से ही यह मांग रही है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना ठीक नहीं है। उनका कहना है कि इससे महिलाओं को आरक्षण मिलने में कई साल लग सकते हैं।
कुछ राज्यों की सीटें हो सकती हैं कम
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन ने भी पहले कहा था कि सरकार चाहे तो महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करके इसे जल्दी लागू कर सकती है। उनका कहना है कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से राजनीतिक समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं, क्योंकि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से कुछ राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं।
पहली बार कब पेश हुआ था बिल
महिला आरक्षण बिल पहली बार 1996 में पेश किया गया था। कई राजनीतिक मतभेदों के कारण यह लगभग 27 साल तक लंबित रहा। 2010 में यह राज्यसभा में पास हो गया था, लेकिन लोकसभा में उस समय इसे पारित नहीं किया जा सका। 2023 में कानून बनने के बाद सरकार इसे जल्द लागू करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
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