America Iran Peace Deal: महीनों से चले आ रहे तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार समझौता हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन कर दिए हैं। इसी के साथ यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को रोकने ऐलान कर दिया है। इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डील पर ट्रंप के साइन वाली कॉपी दिखाई है।
अमेरिका-ईरान डील की शर्तें क्या है?
युद्धविराम और शत्रुता की समाप्ति: MOU पर हस्ताक्षर करने के साथ ही सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से सैन्य अभियानों को रोक दिया गया है। स्थायी युद्धविराम भी स्थापित हो गया है, जिसमें लेबनान का क्षेत्र भी शामिल है। इस समझौते के तहत दोनों देश भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य बल का इस्तेमाल या धमकी नहीं देंगे।
2. संप्रभुता का सम्मान: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे। इसके अलावा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
अंतिम डील के लिए समय-सीमा: दोनों पक्षों के बीच अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम शांति समझौता तैयार किया जाएगा, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है ।
होरमुज जलडमरूमध्य को खोला जाए: MOU पर दोनों देशों के हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। जिसके बाद दोनों पक्षों की सहमति से 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य की जाएगी।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान यह स्पष्ट करता है कि वह परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही उसे विकसित करने का कोई इरादा रखेगा।
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पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका, अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए $३०० बिलियन (300 अरब डॉलर) का फंड सुनिश्चित करने वाली योजना तैयार करेगा।
अगले चरण की बातचीत: समझौते के आर्टिकल 4, 5, 10 और 11 का लागू करने की शुरुआत और इन उपायों के लगातार कार्यान्वयन के आश्वासन के बाद, दोनों देश केवल शेष अनुच्छेदों पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू करेंगे।
कार्यान्वयन तंत्र (Implementation Mechanism): समझौते को सुचारू रूप से लागू करने और भविष्य की प्रतिबद्धताओं की निगरानी के लिए एक क्रियान्वयन तंत्र (Implementation Mechanism) स्थापित किया जाएगा ।
अंतर्राष्ट्रीय वैधता: शांति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के बाद, इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दिलाई जाएगी।
जब्त फंड की बहाली: अमेरिका ईरान के जमे हुए फंड और वित्तीय संपत्तियों को जारी करेगा, जिसका उपयोग ईरान के केंद्रीय बैंक द्वारा तय किए गए भुगतानों के लिए किया जाएगा।
तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और वैश्विक बाजार में ईरानी कच्चे तेल व पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात को फिर से शुरू करने के लिए छूट जारी करेगा।