Nepal Floods: नेपाल से लौट रहे कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों ने पड़ोसी देश में आई विनाशकारी बाढ़ से बाल-बाल बचने की घटना को याद करते हुए कहा कि वे भाग्यशाली थे कि स्थिति बिगड़ने से पहले ही प्रभावित क्षेत्रों को छोड़ दिया था। तीर्थयात्री बजरंग लक्ष्मण ने बताया कि उनका समूह 16 अगस्त को रवाना हुआ था और तीर्थयात्रा पूरी करके लौट रहा है। लक्ष्मण ने कहा 'हम 16 तारीख को यहां से निकले थे और आज लौट रहे हैं। हम बाढ़ से सुरक्षित दूरी पर थे। अगर हम अगले दिन वहां होते, तो हम भी फंस जाते। भगवान की कृपा से हम बच गए।'
एक अन्य तीर्थयात्री स्नेहा पांडे ने बताया कि परिक्रमा पूरी करने के बाद लौटते समय उन्हें आपदा के बारे में पता चला। पांडे ने कहा 'सौभाग्य से, हम 16 तारीख को यहां से निकले थे, और परिक्रमा पूरी करने के बाद लौटते समय हमें घटना के बारे में पता चला।'
उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान की कठिन परिस्थितियों को याद करते हुए बताया कि सागा शहर पूरी तरह से सुनसान था और वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं थी, जिससे भारत में उनके परिवार वाले बहुत चिंतित थे। उन्होंने कहा 'सागा, जो एक छोटा सा शहर है, पूरी तरह से वीरान था और हम इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रहे थे, इसलिए घर पर हमारे परिवार वाले बहुत चिंतित थे।' बता दें, तीर्थयात्रियों का यह अनुभव ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल रसुवा भोटे कोशी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद के हालातों से जूझ रहा है।
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अबतक 675 लोगों की मौत
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के नवीनतम अपडेट के अनुसार, मृतकों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है, जबकि 2,418 लोग अभी भी लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। चितवन में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं, जहां से 246 शव बरामद किए गए। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 165, नवलपरासी पश्चिम में 63, गोरखा में 57, नुवाकोट में 51, धाडिंग में 45, तनहुन में 35 और रसुवा में 13 शव बरामद हुए। NDRRMA ने बताया कि लापता लोगों में भूमिगत जलविद्युत परियोजनाओं के 933 कर्मचारी, 589 विदेशी नागरिक और विदेशी पर्यटकों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिक शामिल हैं। खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 18,708 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। हवाई और जमीनी अभियानों के माध्यम से अब तक 7,514 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि हेलीकॉप्टरों ने 261 उड़ानें भरी हैं।
इस बीच, भारत ने इस आपदा के बाद नेपाल को अपनी सहायता जारी रखी है। विदेश मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने त्रासदी के बाद घटनाक्रम पर नजर रखने और सहायता समन्वय के लिए तुरंत 24 घंटे की हेल्पलाइन सक्रिय कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि खोज और बचाव कार्यों में सहायता के लिए एक विशेष भारतीय तकनीकी दल ने बाढ़ से प्रभावित पनबिजली सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल ने भी अंतरराष्ट्रीय सहायता, विशेष रूप से भारत से मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि नेपाल को भारत से 57 टन से अधिक राहत सामग्री प्राप्त हुई है।