Pakistan Praises India: ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव के चलते चल रहे संघर्ष के बीच पाकिस्तान की ओर से भारत के प्रति एक असामान्य सकारात्मक संदेश आया है। रूस में पाकिस्तान के राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने दोनों परमाणु शक्तिशाली पड़ोसी देशों की परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा रिकॉर्ड की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु सुविधाओं पर हमला न करने की आपसी गारंटी का मजबूत इतिहास रहा है और दोनों देशों की परमाणु सुविधाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।
पाकिस्तान के राजदूत ने क्या कहा?
राजदूत तिरमिजी ने रूसी भाषा की न्यूज पोर्टल आरटीवीआई.कॉम को दिए गए इंटरव्यू में यह बात कही। इंटरव्यू 10 अप्रैल को रिकॉर्ड किया गया था, ठीक उस समय जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में सीधे बातचीत शुरू होने वाली थी। तिरमिजी ने जोर दिया कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने से बचने की विश्वसनीय गारंटी दी हुई है। उन्होंने कहा 'हमारी परमाणु सुविधाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।'
यह बयान इसलिए खास महत्व रखता है क्योंकि हाल ही में मध्य पूर्व के संघर्ष में इजरायल ने ईरान के बूशहर परमाणु प्लांट पर हमला किया था। राजदूत ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि अगर बूशहर पर सीधा हमला होता तो इसके परिणाम सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि फारस की खाड़ी और पाकिस्तान तक फैल सकते थे। उन्होंने आशा जताई कि इजरायल इस घटना से सबक लेगा और समझेगा कि परमाणु सुविधाएं हमेशा अछूती रहनी चाहिए।
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भारत की क्यों की तारीफ?
राजदूत तिरमिजी ने इस मौके पर रूस की भी भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि रूस भारत का करीबी साझेदार है और एससीओ जैसी मंचों पर दोनों देश मिलकर काम करते हैं। पाकिस्तान ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा रखता है और रूस दोनों देशों के बीच विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय डी-एस्केलेशन में भूमिका निभाई थी, हालांकि भारत ने तब सीधे सैन्य बातचीत का श्रेय दिया था।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद को पश्चिम एशिया शांति वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाते हुए पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजदूत का यह सकारात्मक रुख भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया संकेत हो सकता है, खासकर जब क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है। दोनों देश लंबे समय से परमाणु सुरक्षा को लेकर एक-दूसरे पर भरोसा जताते आए हैं, लेकिन राजदूत का खुला बयान इस पर जोर देने का नया प्रयास माना जा रहा है।