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न सिर पर RSS का हाथ, RJD से की सियासी पारी की शुरुआत...फिर दिग्गजों को पछाड़ 'चौधरी' कैसे बने सम्राट

न सिर पर RSS का हाथ, RJD से की सियासी पारी की शुरुआत...फिर दिग्गजों को पछाड़ 'चौधरी' कैसे बने सम्राट

Rise Of Samrat Choudhary In BJP: बिहार की सियासत ने कुछ इस कदर करवट ली की भाजपा का सपना साकार तो हुआ ही, साथ सम्राट चौधरी का भी उभार हो गया। बिहार में भाजपा वर्षों का सूखा खत्म करते हुए बड़े भाई भूमिका में आ गई है। क्योंकि अब नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद भाजपा के सम्राट नए मुख्यमंत्री बन गए हैं।

विधानसभा चुनाव के दौरान ज्यों ही भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें आई, त्यों ही भाजपा का कद बढ़ा और अब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही बड़े भाई वाला तमगा भी मिल गया है। इस सबके बीच सवाल वो पनप रहा है कि सम्राट चौधरी में भाजपा को ऐसा क्या दिखा जो सारे दिग्गजों को छोड़कर उन्हें सीएम बनाया गया।

राजद से राजनीति की शुरुआत

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर 1990 के दशक में उनके पिता शकुनी चौधरी की विरासत के साथ शुरू हुआ। वह 1990 में राजद में शामिल हुए। कुछ दिनों बाद ही उनकी गिनती लालू और राबड़ी के करीबियों में होने लगी। 19 मई 1999 को राबड़ी देवी सरकार में उन्हें कृषि, उद्यान और भार-माप विभाग का मंत्री बना दिया गया। हालांकि, उम्र संबंधि विवाद होने के कारण उनको मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया। फिर भी 2000 और 2010 में परबत्ता सीट से MLA बनकर वापसी की।

जदयू से होते हुए भाजपा में आए

राजद से राजनीतिक का दांव-पेंच सिखने के बाद सम्राट चौधरी ने पाला बदलते हुए  2014 में जदयू में शामिल हो गए। साथ ही राजद के 13 विधायकों को तोड़कर जदयू में शामिल कराया। सम्राट ज्यादा दिन तक जदयू में भी नहीं रहे और ठिक चार साल बाद यानी 2018 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। यहां से वह लगातार नऊ ऊचाइयां छूते गए। साल 2023 में उन्हें बिहार भाजपा अध्यक्ष बनाया गया। फिर 2024 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए में वापसी की तो उनको बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया। 2025 विधानसभा चुनाव के बाद फिर डिप्टी CM बने।

अमित शाह के खासमखास

भाजपा में आने के बाद सम्राट चौधरी का कद लगातार बढ़ता गया। जब 2024 में नीतीश कुमार के समर्थन से बिहार में एनडीए की सरकार बनी तो सम्राट को डिप्टी सीएम बनाया गया। साथ ही गृह मंत्री का जिम्मा सौंपा गया। सरकार में उनकी मौजूदगी नीतीश कुमार के दाएं-बाएं ही रहती थी। इसके साथ ही वह बिहार भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें कई बार दिल्ली मिलने के लिए बुलाया। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह ने सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी।

भाजपा ने ओबीसी चेहरा के तौर पर बढ़ाया आगे

ओबीसी वोटवैंक से लैस बिहार में भाजपा ने सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाया, क्योंकि सम्राट चौधरी भी ओबीसी वर्ग से आते हैं। बिहार की ओबीसी राजनीति ने भी उन्हें बुलंदी तक पहुंचाया। तारापुर विधानसभा से चुनाव जीतकर उन्होंने सियासी जनाधार साबित कर दिया। सम्राट डिप्टी सीएम रहते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं की आवाज बनकर उभरे। इसी का नतीजा रहा कि जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो सम्राट चौधरी के नाम को आगे किया गया।

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RSS बैकग्राउंड नहीं

आर्शचर्य की बात ये है कि सम्राट चौधरी RSS बैकग्राउंड से नहीं आते हैं। उन्होंने राजद से सियासी पारी की शुरुआत की थी। उसके बाद फिर जदयू से होते हुए भाजपा में शामिल हुए। साथ ही उनका कद दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। कद के साथ लोकप्रियता भी बढ़ी। फिर क्या था भाजपा ने उनकी लोकप्रियता को भुनाया। चुनाव के दौरान भी सम्राट चौधरी के नाम की खूब चर्चा हुई। यहीं कारण रहा की भाजपा ने उनको मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया।

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