Iran Economic Loss: होर्मुज स्ट्रेट की संभावित नाकेबंदी को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर यह नाकाबंदी लागू होती है तो ईरान को हर दिन भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों और तेल निर्यात पर रोक लगने से ईरान को लगभग 435 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,081 करोड़ रुपये रोजाना का नुकसान हो सकता है। यह आंकड़ा हालात के बिगड़ने पर और भी बढ़ सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार संकेत दे रहे हैं कि सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी की जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो ईरान से आने-जाने वाले किसी भी जहाज को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को होने वाला नुकसान कई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे कि नाकेबंदी कितनी सख्त होगी और ईरान कितनी मात्रा में तेल अन्य रास्तों से निर्यात कर पाएगा। इसके अलावा पहले से समुद्र में मौजूद लगभग 154 मिलियन बैरल तेल भी इस स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
ईरान के लिए ये इलाका है जरूरी
पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारी के अनुसार, ईरान के नुकसान में मुख्य रूप से कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल्स के निर्यात में कमी शामिल होगी। अनुमान है कि ईरान रोजाना लगभग 1.5 मिलियन बैरल तेल निर्यात करता है, जिसकी कीमत युद्धकालीन बाजार में लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल है। मध्य पूर्व में इस समय अमेरिका के 16 युद्धपोत तैनात हैं, लेकिन फारस की खाड़ी में अभी कोई बड़ा युद्धपोत मौजूद नहीं है। यह इलाका ईरान की समुद्री सीमा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नाकाबंदी लागू करना नहीं आसान
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नाकाबंदी लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं। ऐसे में इसे रोकने के लिए भारी सैन्य संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। तनाव की यह स्थिति तब और बढ़ गई जब हाल ही में संघर्ष विराम को लेकर हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। ईरान पहले भी इस जलमार्ग पर कुछ प्रतिबंध लगा चुका है और केवल कुछ चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी थी। इस पूरे घटनाक्रम से वैश्विक तेल आपूर्ति और बाजार पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।