Jagannath Rath Yatra: पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस यात्रा का सबसे खास और पवित्र हिस्सा भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल रथों को खींचना होता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य अवसर का इंतजार करते हैं और रथ की रस्सी खींचकर खुद को धन्य मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ अपने मौसी घर यानी गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। इस दौरान भक्त उनके रथों को खींचते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को भगवान का आशीर्वाद मिलता है और उसके जीवन के पाप समाप्त हो जाते हैं।
रथ की रस्सी का क्या है नाम
पुराणों में बताया गया है कि रथ की रस्सी, जिसे शंखचूड़ कहा जाता है, बेहद पवित्र मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस रस्सी को छूता है या रथ खींचने में भाग लेता है, उसे पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए रथ खींचना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। रथ यात्रा से पहले हर साल नए रथ तैयार किए जाते हैं। इन्हें विशेष और पवित्र लकड़ी से हाथों से बनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन कहलाता है। इन रथों को रंग-बिरंगे कपड़ों, फूलों और ध्वजों से सजाया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
रथ खींचने से पहले वैदिक मंत्रों का जाप
रथ खींचने से पहले वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है और फिर पवित्र रस्सियों को रथों से बांधा जाता है। इसके बाद "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच हजारों-लाखों श्रद्धालु एक साथ रथ को खींचते हैं। यह दृश्य श्रद्धा, भक्ति और एकता का अद्भुत उदाहरण होता है। रथ यात्रा हमें यह भी सिखाती है कि भगवान के सामने सभी समान हैं। इस आयोजन में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ रथ खींचते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करेंगे और रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करेंगे। यह यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, एकता और मानवता का संदेश देने वाला महान पर्व है। "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ पूरी पुरी नगरी भक्तिमय रंग में रंग जाती है और श्रद्धालुओं का विश्वास भगवान के प्रति और भी मजबूत हो जाता है।
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