Ranchi Protest: झारखंड में छात्रों और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत में कई मुद्दों पर बात बन गई लेकिन, सीबीआई जांच के लिए सोरेन सरकार तैयार नहीं है। नतीजा ये है कि 10 अगस्त को पहले निर्धारित विधानसभा घेराव का कार्यक्रम छात्रों ने किया।
अब सवाल है कि अगर झारखंड सरकार न्यायिक जांच के लिए तैयार है, परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ गिरफ्तारियां हो रही है। फिर सीबीआई से क्यों पीछे हट रही है झारखंड सरकार? क्या झारखंड सरकार को भय है कि सीबीआई की जांच में बड़े-बड़े नाम सामने आएंगे, चलिए जानते हैं।
क्या है कोई कानूनी पेंच
सबसे पहले ये समझना होगा कि क्या राज्य सरकार के पास सीबीआई जांच कराने का अधिकार है। दरअसल, सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियन एक्ट के तहत काम करती है। इसकी धारा 6 के तहत किसी राज्य में सीबीआई को जांच करने के लिए राज्य की सहमति जरूरी होती है। राज्य सरकार किसी खास मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकती है। इसका मतलब साफ है कि किसी भी मामले की जांच के लिए झारखंड सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकती है।
क्या झारखंड सरकार सीबीआई जांच से भयभीत
यही वो सवाल है जो सबसे ज्यादा उठ रहे हैं कि क्या झारखंड सरकार सीबीआई जांच से भयभीत है। हालांकि, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सरकार सीबीआई जांच से इसलिए डर रही है क्योंकि सरकार के लोग लपेटे में आ सकते हैं। ऐसा आरोप लगाने के लिए ठोस सबूत चाहिए। दूसरी तरफ सरकार के पास यह बताने की चुनौती है कि जब वह परीक्षा रद्द करने, न्यायिक निगरानी, फास्ट ट्रैक कोर्ट और ईडी जांच के लिए तैयार हो सकती है तो सीबीआई जांच से पीछे क्यों हट रही है।
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