PROPOSE करने के लिए घुटनों पर ही क्यों बैठा जाता है? जानें इसके पीछे की वजह

PROPOSE करने के लिए घुटनों पर ही क्यों बैठा जाता है? जानें इसके पीछे की वजह

Why is the proposal done sitting on the knees: हर साल फरवरी के दूसरे सप्ताह में वैलेंटाइन्स वीक मनाया जाता है। इस वीक में अलग-अलग दिन में अलग-अलग डे मनाए जाते है। पहले दिन यानी 7 फरवरी को रोज डे मनाया गया और आखिरी दिन 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे सेलिब्रेट कर इस वीक को खत्म किया जाता है। वहीं दूसरा दिन प्रपोज डे पर प्यार करने वाले लोग अपने पार्टनर से अपने प्यार का इज़हार करते हैं। वहीं आज के दिन लोग घुटनों पर बैठकर अपने प्य़ार का इज़हार करते है और अगर उसकी किस्मत अच्छी होगी तो उसका ये इज़हार लड़की को पसंद भी आ सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घुटनों पर ही बैठकर क्यों प्रपोज किया जाता है, चवलिए आपको इसके पीछे की कहानी बताते है।

घुटनों पर बैठकर ही क्यों किया जाता है PROPOSE

दरअसल घुटने पर बैठकर प्रपोज करने की शुरुआत का कोई लिखित साक्ष्य तो नहीं है लेकिनइस पर कुछ जानकारों की राय है। जिसमें उन्होंने कहा कि  प्रपोज का ये स्टाइल एक तरह से वादे को दर्शाता है। इस परंपरा की शुरुआत मध्यकालीन युग में हुई थी। उस समय में योद्धा कुलीन महिलाओं के आगे घुटने पर झुका करते थे। कई औपचारिक अनुष्ठानों के लिए तब घुटने टेकना भी एक प्रोटोकॉल हुआ करता था। उस दौर की कई पेंटिंग्स में इसकी झलक देखने को मिलती हैं।

कहा जाता है कि उस समय में घुटने पर झुकना सम्मान का संकेत होता था और उस समय विवाह और धर्म एक-दूसरे से काफी जुड़े हुए थे। ऐसे में जिस प्रकार सिपाही अपने भगवान के सामने सम्मान, वफादारी दिखाने के लिए घुटने टेकता ठीक वैसे ही पुरुषों को अपनी महिला साथी को घुटनों पर बैठकर शादी के लिए प्रपोज करना होता था।

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