टर्मिनल और सेंट्रल के नाम से ही क्यों जाना जाते है स्टेशन, रेलवे ने बताई वजह

टर्मिनल और सेंट्रल के नाम से ही क्यों जाना जाते है स्टेशन, रेलवे ने बताई वजह

नई दिल्ली: आप लोगों ने अपनी जीवन में कभी ना कभी रेल में सफर जरूर किया होगा और आपने स्टेशनों पर लिखे जंक्शन, टर्मिनल, सेंट्रल पर ध्यान जरूर दिया होगा लेकिन कभी आपने ये सोचा है कि नाम हर स्टेशन पर अलग क्यो होता है। दरअसल भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। जहां 7हजार से भी ज्यादा रेलवे स्टेशन है। वहीं स्टेशन के अलग-अलग नाम रखने के पीछे एक वजह होती है जो रेलवे ने बताई है। तो चलिए आज हम आपको इन नामों के रहस्यों के बारे में बताते है।

टर्मिनल

सबसे पहले बात करते है टर्मिनल की। अगर किसी स्टेरशन पर टर्मिनल लिखा रहे तो समझ लेना वह आखिरी स्टेशन है. जहां से ट्रेनें आगे नहीं जाती हैं यानी कि यहां से ट्रेन की शुरूआत होती है या यात्रा खत्म होती है. जैसे दिल्ली का आनंद विहार टर्मिनल और मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस इसके उदाहरण है।

सेंट्रल

अगर आप किसी रेलवे स्टेशन पर सेंट्रल लिखा देखें, तो समझ लेना कि ये शहर का सबसे मेन और सबसे पुराना रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन पर एक साथ कई ट्रेनें आती-जाती हैं। आपको ये बात भी ध्यान रखना चाहिए कि सेंट्रल स्टेशन उन्हीं शहरों में बनाया जाता है, जहां दूसरे रेलवे स्टेशन भी मौजूद होते हैं। इन रेलवे स्टेशनों की मदद से ही बड़े शहरों को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है। जैसे मुंबई सेंट्रल, कानपुर सेंट्रल और चेन्नई सेंट्रल।

जंक्शन

अगर आप जंक्शन लिखा देखें, समझ जाना कि यहां दो से ज्यादा ट्रेन के रूट निकल रहे हैं। जंक्शन पर कम से कम तीन मार्ग होते ही हैं, एक से ट्रेन आती है और दो विकल्प उसके पास होते हैं कि किस मार्ग से उसे जाना है। ऐसे में ट्रेन अपना मार्ग चुन लेती है। इसके अलावा इससे रेलवे ट्रैफिक में भी कोई दिक्क्त नहीं आती है। मथुरा जंक्शन से सात रूट निकलते हैं। वहीं, इसके बाद सेलम जंक्शन जहां से छह रूट निकलते हैं।

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