दिवाली के दिन ही घी के दिया क्यों जलाए जाता है?

दिवाली के दिन ही घी के दिया क्यों जलाए जाता है?

नई दिल्ली: दिवाली के केवल दो दिन बचे है। हर किसी को दिवाली का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते है और बच्चे पटाखे जलाते है। हालांकि पटाखे फोड़ना बैन है। लेकिन कुछ राज्यों में ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है। दिवाली के दिन घरों में घी के दिए जलाए जाते है लेकिन कभी आपने सोचा है कि दिवाली के दिन घी के दिए क्यों जलाए जाते है? ज्यादातर लोगों को नहीं पता होगा कि घी के दिए क्यों जलाएं जाते है तो आज हम आपको इन सभी सवालों के जवाब देंगे।

क्यों जलाया जाता है घी का दिया

दरअसल सबसे बात करें दिवाली की तो दिवाली का पर्व सबसे पहले श्रीराम के लौट आने की खुश में मनाई गई थी। ये तो सभी को पता है कि श्रीराम को 14 वर्षो का वनवास पिता द्वारा दिया गया था जिसके बाद श्रीराम ने कुछ भी सवाल ना किए वनवास चले गए थे। फिर 14 वर्षों बाद श्रीराम आयोध्या लौटे थे। श्रीराम के लौट आने की खुश में पूरी आयोध्या में घी के दिए जलाए गए थे। तब से आज तक दिवाली का पर्व मनाया जाता है। वहीं अब बात करें घी के दिए कि तो कहा जाता है कि घी के दिए जलाने से घर में सुख-समृध्दि आती है और साथ ही साकारात्मकएनर्जी आती है।

इतनी ही नहीं नाकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है। साथ ही कहा जाता है कि घर में घी के दिए जलाना शुभ माना जाता है। इसलिए दिवाली के दिन घी के दिए जलाए जाते है। इसके अलावा दीपावली की रात को गाय के दूध का शुद्ध घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए। मान्‍यता है कि इससे तुरंत ही कर्ज से राहत मिल जाती है और धन संबंधी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।  वहीं अगर घर में की व्यक्ति बीमारी से ग्रस्त है तो उसके कमरे में घी के दिए जलाने से बीमारी से जल्द ठीक होने की उम्मीद होती है क्योंकि घी के दिए से साकारात्म ऊर्जा की उत्पति होती है।    

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