Pralhad Joshi Qualification: केंद्र सरकार में बड़े फेरबदल के बाद प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है। इससे पहले वह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें ऐसे मंत्रालय की कमान मिली है, जिसका सीधा संबंध देश के करोड़ों छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से है। धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद प्रह्लाद जोशी ने यह जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे समय में उन्हें मंत्रालय मिला है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को आगे बढ़ाने और उच्च शिक्षा में सुधार जैसे कई अहम काम पूरे करने हैं।
कहां से की पढ़ाई
अगर उनकी पढ़ाई की बात करें तो प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक के हुबली में अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने धारवाड़ स्थित कदाससिद्धेश्वर कला महाविद्यालय से बीए (आर्ट्स) की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में स्नातक की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन के दौरान ही उनकी रुचि सामाजिक कार्यों और जनसेवा की ओर बढ़ने लगी थी।
पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके
प्रह्लाद जोशी ने इंजीनियरिंग, कानून या प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की है, लेकिन उनके पास लंबे समय का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव है। वह पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके हैं। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भी उन्होंने सरकार और विपक्ष के बीच समन्वय बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीति में आने से पहले वह व्यापार और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक में हुआ था। वर्ष 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता और तब से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं।
शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना
नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत करना है। खासकर NEET विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मजबूत करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना और स्कूलों व विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। अब सभी की नजर प्रह्लाद जोशी पर होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि दूसरे मंत्रालयों में मिले उनके अनुभव का लाभ देश की शिक्षा व्यवस्था को कितना मिलता है और उनके फैसलों से छात्रों, शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों को कितना फायदा पहुंचता है।
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