
Astrology Tips: हिन्दू धर्म में वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु शास्त्र में अलग-अलग दिशाओं में भी वास्तु दोष होने की बात कही गई है। वास्तु दोष होने पर कई तरह की समस्याएं व्यक्ति को परेशान करती हैं। इन्हें दूर करने के लिए दिशा के मुताबिक देवताओं की पूजा करनी पड़ती है। जिसके बाद लोगों को परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
शास्त्रों के मुताबिक माना जाता है कि यदि घर में वास्तु दोष हो तो चारों तरफ माहौल नकारात्मक हो जाता है। कई शुभ कामों में बेवजह विघ्न आते हैं। वास्तु शास्त्र में अलग अलग दिशाओं का वास्तु दोष समाप्त करने के लिए अलग-अलग देवताओं की पूजा करने की बात कही गई है।
पूर्व दिशा
वहीं हिन्दू धर्म में पूर्व दिशा के देव भगवान सूर्य को माना गया है। इस दिशा में वास्तु दोष होने पर पिता पुत्रों के संबन्धों में खटास, नौकरी की समस्या, यश प्रतिष्ठा का कम होने जैसी समस्याएं आती हैं। पूर्व दिश का वास्तु दोष दूर करने के लिए नियमित तौर पर सूर्य को जल देना चाहिए और आदित्य ह्दय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। आप चाहें तो गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।
पश्चिम दिशा
पश्चिम दिशा के स्वामी शनि देव हैं। इस दिशा में वास्तु दोष होने पर शनि संबन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस दिशा के दोष दूर करने के लिए आप शनिदेव की आराधना करें। हर शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
दक्षिण दिशा
ये दिशा मंगल और यमराज की मानी जाती है। दक्षिण दिशा में दोष होने पर क्रोध बढ़ता है और आपसी टकराव की स्थिति पैदा होती है। दक्षिण दिशा का दोष दूर करने के लिए नियमित तौर पर हनुमान बाबा की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व दिशा को आग्नेय कोण कहा जाता है, जिसे शुक्र देव कहा जाता है। इस दिशा में दोष होने पर असफलता और प्रेम संबंध में समस्याएं होती है। इसे दूर करने के लिए माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
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