प्रयागराज से लौटते वक्त छलका शंकराचार्य का दर्द, जाते-जाते बोल गए भावुक करने वाली बात

प्रयागराज से लौटते वक्त छलका शंकराचार्य का दर्द, जाते-जाते बोल गए भावुक करने वाली बात

Shankaracharya Row: संगमनगरी प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद पर ब्रेक लगता हुआ नजर आ रहा है। प्रयागराज में धरने पर 10 दिनों तक बैठने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने विदा लेने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने प्रशासन के साथ चल रहे टकराव पर अपनी बात रखी है। प्रयागराज से जाते वक्त उनका दर्द भी छलक पड़ा।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें पुष्प वर्षा नहीं सम्मान चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके बटुकों और संन्यासियों के साथ हुए दुर्व्यहार पर क्षमा याचना मांगनी चाहिए थी, प्रयागराज में जो कुछ हुआ उसने भीतर तक झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि मन व्यथित है, मैं बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहा हूं। अन्याय को हमने अस्वीकार कर दिया है और अब केवल न्याय की प्रतिक्षा करेंगे। 

शंकराचार्य ने प्रस्ताव को ठुकराया

बताया जा रहा है कि विवाद को खत्म करने के लिए प्रशानस ने शंकराचार्य के सामने एक औपचारिक प्रस्ताव भी रखा गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि जब भी महाराज जी स्नान के लिए जाना चाहे, उन्हें ससम्मान पालकी के साथ ले जाया जाएगा। जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन तैनात सभी अधिकारी उनके स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे। प्रस्ताव में कहा गया था कि उनके ऊपर पुष्प की वर्षा की जाएगी। जिसके बाद शंकराचार्य ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि क्षमा का कोई शब्द नहीं था।

क्यों हुआ था विवाद

बता दें कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने पालकी पर सवार होर संगम नोज की तरफ बढ़ रहे थे। हालांकि भीड़ बढ़ने के कारण प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया लेकिन, शंकराचार्य के समर्थक उनके रथ को आगे ले जाने के लिए अड़ गए थे। जिसके चलते प्रशासन और उनके समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। यहां भीड़ बढ़ने और अव्यवस्था की आशंका के चलते शंकराचार्य को जुलूस रोक दिया गया। जिसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए थे। ये मामले सामने आने के बाद काफी विवाद भी हुआ।

Leave a comment