
Ajab-Gajab: कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान कहा जाता है, जहां की दो झील बहुत मशहुर है। पहली झील कैलाश मानसरोवर और दूसरी झील का नाम राक्षस ताल है। पुराणों की माने तो मानसरोवर झील को भगवान ब्रह्मा के मन से उत्पन्न बताया गया है। तो दूसरी तरफ राक्षस झील उतनी ही रहस्यमय है। इस झील को ‘राक्षस की झील’या ‘शैतान की झील’के नाम से भी जाना जाता है।
बता दें कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह वहीं स्थान है, जहां राक्षस राजा रावण ने भगवान शिव की तपस्या की और उनकी आराधना की थी। राक्षस ताल का निर्माण कब और कैसे हुआ था, इसके लिए अलग-अलग कथाएं बताई जाती है। वहीं राक्षस ताल, कैलाश पर्वत पश्चिम में करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ताल के आसपास 4 द्वीप हैं जिसमें डोला, लाचतो,तोपसरमा और दोशर्बा। राक्षस ताल को तिब्बती भाषा में लांगगर चो या ल्हानाग त्सो के नाम से जान जाता है, जिसका अर्थ है “ जहर की काली झील”। वहां के लोगों का मानना है कि इसका पानी शापित है।
कैसे बनी ये झील?
गौरतलब है कि एक कहानी में बताया गया है कि राक्षस ताल का निर्माण खुद रावण ने किया था। रावण अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कैलाश पर्वत गया था। कैलाश जाने से पहले राक्षस ताल में स्नान किया और वहीं ध्यान लगाया। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि जब रावण ने राक्षस ताल में डुबकी लगाई तो झील आसुरी शक्तियों के कब्जे में आ गई। नकारात्मकता से भर गई थी।
शुरूआती शिक्षा में रावण ने किया था ये काम
वहीं अपनी शुरूआती शिक्षा के बाद रावण ने कई साल तक शिव की गहन तपस्या की थी। तपस्या के दौरान रावण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए बलिदान के रूप में अपना सिर 10 बार काटा था। जिसके बाद भगवान शिव उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया। रावण ने भगवान शिव से अमरता मांगा जिसे शिव ने देने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने उसे अमरता का दिव्य अमृत दिया। जिसका मतलब ये था कि रावण जब तक जीवित रहेगा, तब तक उसे परास्त नहीं किया जा सकता है।
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