
नई दिल्ली: देशभर में प्रदूषण के साथ-साथ सर्दी की शुरूआत हो गई हैं। बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण स्तर में गिरावट और बढ़ोतरी देखने को मिल रही हैं, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा हैं कि प्रदूषण और धुंध में क्या फर्क हैं। कई बार लोग प्रदूषण को ही धुंध यानी फॉग समझ लेते तो चलिए आज हम आपको इसे बारे में बताते हैं।
क्या हैं स्मॉग और फॉग
दरअसल आसान भाषा में कहें तो स्मॉग यानी जानलेवा धुआं और फॉग यानी कोहरे को कहा जाता हैं। जहां फॉग लोगों में सांस संबंधी साधारण समस्याएं पैदा करता है वहीं स्मॉग काफी खतरनाक है। यह फेफड़े में कैंसर से जुड़े जहरीले तत्वों को डालता है जो कि ऐसे तत्व हैं जो अगर आपकी बॉडी में एक बार चले गए तो उनका बाहर निकलना बहुत मुश्किल है।
स्मॉग से सांस लेने में होती हैं परेशानी
स्मॉग, फॉग और स्मोक यानी कोहरे और धुएं का कॉम्बिनेशन होता है। इसमें खतरनाक और जानलेवा गैसें जैसे सल्फर डाईऑक्साइड, बेन्जीन भारी मात्रा में पाई जाती हैं जो कि स्मोक बनाती है फिर फॉग से रिऐक्शन करके केमिकल कंपाउंड बनाती हैं जिससे स्मॉग बनता है। इस तरह के स्मॉग बनाने वाले ज्यादातर कम्पाउंड फैक्ट्रियों से निकले वाला धुआं, फसलों और पराली को जलाने से और ऐसे कई पावर प्लांट से आते हैं जहां ये खतरनाक गैसें नियमित रूप से इस्तेमाल होती हैं और रिलीज की जाती हैं।
स्मॉग और फॉग में अंतर
अब बात करते हैं इसके अंतर की तो फॉग सफेद रंग का होता है वहीं वैसी हवा जिसका रंग ग्रे होता है उसे वैज्ञानिकों ने स्मॉग का नाम दिया है क्योंकि यह फॉग नहीं है। फॉग जहां हमेशा नीचे की ओर जाता है वहीं स्मॉग हवा में तैरता रहता है और जहरीले कण को ट्रांसफर करता रहता है जिसे हम सांस के जरिए अंदर लेते रहते हैं।
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