जानें किस दिन है विवाह पंचमी, क्यों माना जाता है इस दिन को शादी के लिए अशुभ

जानें किस दिन है विवाह पंचमी, क्यों माना जाता है इस दिन को शादी के लिए अशुभ

नई दिल्ली:  हिंदु पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी(vivah panchami 2022) के नाम से जाना जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म में खास महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। लेकिन क्यों यें दिन विवाह के लिए अशुभ हैं

आईए जानते है

बता दे कि देव उठनी एकादशी के बाद चातुर्मास से शादी-विवाह के शुभ दिन शुरू हो जाते है इसके बाद लोग बिना किसी झिझक के शुभ मुहूर्त देखकर विवाह कर सकते हैं लेकिन विवाह पंचमी जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और जनक दुलारी माता सीता के विवाहोत्स के रूप में हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है । वैसे तो श्री राम और माता सीता की उपासना के लिए यह दिन बड़ा ही शुभ है, लेकिन क्या आपको पता हैं कि इस दिन को शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

विवाह पंचमी पर क्यों नहीं करनी चाहिए शादी?

ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि विवाह पंचमी का दिन शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए सही नहीं होते है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम का विवाह सीता से हुआ था भले ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम का दर्जा प्राप्त है, लेकिन उनसे शादी करने के बाद सीता को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ा इसलिए इस दिन विवाह करने से बचने को कहा जाता है। माता सीता मिथिला के राजा जनक की सबसे बड़ी पुत्री थीं उन्हें जानकी भी कहा जाता है। राजा जनक को सीता एक खेत में मिली थी इसलिए उन्हें धरती कि बेटी भी कहा जाता है। सीता का भगवान राम से विवाह होने के बाद उन्हे आए दिन काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ा। उनकी विवाहित जिंदगी उतनी आसान नहीं थी। उन्हें विवाह के पश्चात 14 वर्ष का वनवास काटना पड़ा इस दौरान उनका गुजारा करना काफी मुश्किल हो गया था।

इतना ही नहीं वनवास के समय ही लंकापति रावण ने उनका अपहरण कर लिया था जहां  माता सीता को बहुत दुखों और कष्टों को झेलना पड़ा। फिर भी उनका दुख खत्म नहीं हुआ वनवास के बाद अयोध्या लौटते ही कुछ समय बाद ही श्री राम को मजबूरन सीता का परित्याग करना पड़ा, तब देवी सीता ने एक आश्रम में अपने दो पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया। कुल- मिला कर माता सीता का जीवन विवाह के बाद कष्टों से भरा था। यहीं कारण है कि इस दिन लोग अपनी बहनों या बेटियों की शादी नहीं करते क्योंकि उन्हें डर रहता हैं कि उनकी बेटी या बहनों को भी इन दुखों को झेलना पड़ेगा।

Leave a comment