चुनाव खत्म होते ही बांग्लादेश में हिंसा शुरू! काली माता मंदिर में हुई तोड़फोड़

चुनाव खत्म होते ही बांग्लादेश में हिंसा शुरू! काली माता मंदिर में हुई तोड़फोड़

Violence In Bangladesh: बांग्लादेश में चुनाव खत्म होते ही हिंदुओं और उनके मंदिरों में फिर से तोड़फोड़ होने लगी है। ताजा घटना खोकशाबारी, सबुल्लिपारा की है। जहां काली मंदिर में रखी गई मूर्ति को अराजक तत्वों ने तहस-नहस कर दिया। यह घटना बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव के बाद हुई है, जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने सबसे अधिक 212 जीती की हैं।

दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 76 सीटें जीती हैं। बता दें कि काली मंदिर में तोड़फोड़ की यह घटना नीलफामारी जिले में हुई है, जहां जमात-ए-इस्लामी ने सभी सीटें जीत है। जिसमें नीलफामारी-3भी शामिल है। यहां ओबैदुल्लाह सलाफी ने जीत हासिल की है।

मंदिर में हुई तोड़फोड़

इस घटना के बाद अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदू में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। नीलफामारी जैसे उत्तरी जिलों में जमात-ए-इस्लामी का वर्चस्व ज्यादा है। इसलिए यहां हिंदुओं पर हमले फिर शुरू होने लगे हैं। हमलावरों ने खोकशाबारी गांव के सबुल्लिपारा इलाके में स्थित प्राचीन काली मंदिर में तोड़फोड़ की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, चुनावी नतीजे आने के बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर को क्षति पहुंचाई, मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया, और परिसर में आग लगाने का प्रयास किया गया। यहां तक की मंदिर की दीवारें टूटी हुई हैं। मंदिर के गर्भगृह में सामग्री बिखरी पड़ी है।

हिन्दुओं में डर का माहौल

बता दें कि नीलफामारी में अल्पसंख्यक पहले से ही असहज महसूस कर रहे हैं। भारतीय सीमा से सटे जिलों में 51 सीटों पर जमात-ए-इस्लामी की जीत के बाद हिंदुओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं। बांग्लादेश में हिन्दू समुदाय की आबादी का लगभग 8-12% है। अब उसको धमकियां, संपत्ति पर कब्जा और धार्मिक स्थलों पर हमलों का डर सताने लगा है। कई परिवारों ने सुरक्षा के लिए पड़ोसी इलाकों में शरण ली है। यह घटना बांग्लादेश में चुनाव के बाद हिंसा का एक उदाहरण है, जहां राजनीतिक बदलाव के साथ साम्प्रदायिक तनाव बढ़ जाता है। नए सरकार को अल्पसंख्यक सुरक्षा, संक्रमणकालीन न्याय और सुलह प्रक्रिया पर तत्काल ध्यान देना होगा। ताकि ऐसी घटनाएं न हों।

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