Vijayadashami 2026: महाराष्ट्र के नागपुर में विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधित करते हुए एकता, AI से लेकर फ्रांस प्रोटेस्ट पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों का सामना कर रहा था और लोगों पर अत्याचार हो रहे थे तब चारों ओर डर का माहौल था। ऐसे समय में संत रविदास ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश के स्वाधिनता के समय जो वातावरण था। उस वातावरण में हमको स्वतंत्र करने के लिए प्रयास करने वाले महापुरुष को और उस समय के समाज को जितनी तपस्या और समर्पण के द्वारा यह सब करना पड़ा, उससे कई गुणा अधिक की आवश्यकता आज की परिस्थिति में पड़ेगी। जब हम परिस्थिति को देखते हैं तो ध्यान में आता है। अपना भारत विविधता का देश है। यहां अनेक प्रकार की प्राकृतिक विविधता है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इस देश को एक होकर चलना है जो चलता आया है और आगे भी चलना है तो आधारभूत तत्व ऐसा चाहिए जो इन सभी को स्वीकार करेगा, सम्मान देगा, प्रतिष्ठा और सुरक्षा की चिंता करेगा। ऐसा आधार हमारे पास कौन सा है? दुनिया के उपलब्ध विचारों में ऐसा कोई नहीं है। सौभाग्य से ऐसा विचार परंपरा से हमारे पास है। जो मनुष्यता की सनातन खोज है, उसी में मनुष्यता आगे बढ़ती है, उस सुख की खोज के लिए। इसलिए उस सुख को प्राप्त करना यह मनुष्य जीवन का ध्येय है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "दुनिया में भारत को लेकर एक नई उत्सुकता बढ़ रही है। दुनिया भारत पर ध्यान दे रही है। देश का कद बढ़ रहा है और यह आगे बढ़ रहा है। इसलिए, भारत को लेकर उत्सुकता भी बढ़ रही है। उनका जीवन भौतिकवाद, व्यक्तिवाद और बेलगाम उपभोग पर आधारित है। भौतिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद, उनके जीवन में जो समस्याएं पैदा हुई हैं, वे उन्हें परेशान कर रही हैं। उन्हें नहीं पता कि दुनिया की विविधताओं को कैसे संभालें, विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें, और जो हमसे अलग हैं, उनके साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार कैसे करें। यही कारण है कि हम देख सकते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक लगने के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। आर्थिक अनिश्चितता, पर्यावरणीय संकट और वर्चस्व की लड़ाई विनाश की ओर ले जा रही है। दुनिया जानती है कि इन समस्याओं के जवाब भारत के पास हैं।