Uttarakhand News: उत्तराखंड में देहरादून में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई ईंधन बचत की अपील पर अमल करते हुए साइकिल अपनाने वाले पार्टी कार्यकर्ता नवीन ठाकुर का हौसला केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा ने बढ़ाया। पीएम की प्रेरणा से वे अब तक लगभग 4 हजार किलोमीटर से अधिक साइकिल चलाकर ऊर्जा संरक्षण का संदेश फैला चुके हैं।
आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के जॉलीग्रांट एयरपोर्ट आगमन पर नवीन ठाकुर साइकिल से ही वहां पहुंचे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश महामंत्री श्री कुंदन परिहार और प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान की मौजदगी में केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा ने नवीन से मुलाकात की और उनका प्रोत्साहन किया। उनके इस प्रयास की सराहना करते हुए नड्डा ने उन्हें शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि साइकिल का उपयोग केवल ईंधन बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, बेहतर स्वास्थ्य और यातायात का दबाव कम करने की दिशा में भी एक प्रभावी पहल है। उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर अनेक युवाओं ने भी अपने दैनिक छोटे-छोटे कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग शुरू किया है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जा रहा है। कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग छोटी दूरी की यात्रा साइकिल से करना शुरू करें तो देश में ईंधन की बचत, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को एक साथ बढ़ावा मिल सकता है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "ऊर्जा संरक्षण और राष्ट्रहित" के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
इस अवसर पर अपने अभियान की जानकारी देते हुए नवीन ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को देशवासियों से ईंधन की बचत का आह्वान किए जाने के बाद उन्होंने स्थानीय यात्राओं के लिए साइकिल को अपना नियमित परिवहन माध्यम बना लिया है। इस दौरान वे प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों और भारत द्वारा अपनी लगभग 85 प्रतिशत ऊर्जा आयात किए जाने का उल्लेख करते हुए नागरिकों से पेट्रोल-डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील भी करते हैं। इसी प्रेरणा से नवीन ठाकुर ने संकल्प लिया कि सहसपुर, विकासनगर, डाकपत्थर तथा देहरादून स्थित भाजपा कार्यालय सहित आसपास के सभी स्थानीय कार्यों के लिए वे साइकिल का ही उपयोग करेंगे। इसी तरह उनके घर से बलबीर रोड स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय की दूरी लगभग 37 किलोमीटर है। ऐसे में वे नियमित रूप से प्रतिदिन लगभग 70 से 80 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर संगठनात्मक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। वहीं, संगठनात्मक दायित्वों के तहत दूरस्थ जिलों जैसे उत्तरकाशी, पुरोला, टिहरी, कोटद्वार और चंपावत आदि की यात्राएं वे दोपहिया वाहन से करते हैं, जिससे अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों के उपयोग और ईंधन की खपत को कम किया जा सके।