UDHAM SINGH DEATH ANNIVERSARY: 21 साल बाद उधम सिंह ने इस तरह लिया जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला

UDHAM SINGH DEATH ANNIVERSARY: 21 साल बाद उधम सिंह ने इस तरह लिया जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला

नई दिल्ली: आज पूरेदेश भर में शहीद उधम सिंह की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। बता दें कि आज ही के दिन 1940 में उन्हें माइकल ओ डायर की हत्या के आरोप में पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई थी। सरदार उधम सिंह का नाम भारत की आजादी की लड़ाई में पंजाब के क्रांतिकारी के रूप में दर्ज है। उनका असली नाम शेर सिंह था और कहा जाता है कि साल 1933 में उन्होंने पासपोर्ट बनाने के लिए 'उधम सिंह' नाम अपनाया।

दरअसल 1919 में रॉलेट एक्ट के तहत कांग्रेस के सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू को अंग्रेजों द्वारा अरेस्ट करने के बाद पंजाब के अमृतसर में हजारों की तादाद में लोग एक पार्क में जमा हुए थे। इन लोगों का मकसद शांति से प्रोटेस्ट करना था। हालांकि अंग्रेजों के जनरल रेजिनाल्ड डायरने अपनी फौज के साथ उन मासूम लोगों को मार गिराया था। इसमें उसका साथ उस समय पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ'डायरने दिया था। जिसे हम जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जानते है। उधम सिंह 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार के साक्षी थे। इस नरसंहार को देखने के बाद उधम सिंह ने स्वतंत्रता की लड़ाई में कूदने और रेजिनाल्ड डायरऔर माइकल ओ'डायरसे बदला लेने की प्रतिज्ञा ली।

जिसके बाद सरदार उधम सिंह क्रांतिकारियों के साथ शामिल हुए और उनसे चंदा इकट्ठा कर देश के बाहर चले गए। उधम सिंह के लंदन पहुंचने से पहले जनरल रेजिनाल्ड डायरब्रेन हैमरेज के चलते मौत हो गई थी। ऐसे में उन्होंने अपना पूरा ध्यान ओ'डायर को मारने पर लगाया और उसे पूरा भी किया। 13 मार्च 1940 को रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हॉल में बैठक थी। वहां ओ'डायर भी स्पीकर्स में से एक था। उधम सिंह उस दिन टाइम से वहां पहुंच गए। उधम ने अपनी बन्दूक को एक मोती किताब में छुपाया था।

मौका लगने पर उन्होंने निशाना लगाया, दो गोलियां ओ'डायर को लगी जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई। हालांकि वहां से भागने की कोशिश में उधम सिंह पकड़े गए थे। इसके बाद उनके ऊपर मुकदमा चला और कोर्ट में उनकी पेशी भी हुई। जहां उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दे दी गई। 

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