छठ पर्व का आज दूसरा दिन, जानें इस दिन का महत्व

छठ पर्व का आज दूसरा दिन, जानें इस दिन का महत्व

नई दिल्ली: छठ के महापर्व की शुरूआत हो चुकी है। आज देशभर में छठ पर्व का दूसरा दिन मनाया जा रहा है जिससे खरना कहा जाता है। खरना का अर्थ की बात करें तो इसका मतलब होता है शुद्धिकरण। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाने की परंपरा है। बता दें कि छठ पर्व का खासा महत्व बिहार में मनाया जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद की परंपरा होता है।

छठ माता के प्रसाद करते है तैयार

इस दिन महिलाएंपूरे दिन व्रत रखती हैं और छठी माता का प्रसाद तैयार करती है। इस दिन गुड़ की खीर बनती है वो भी मिट्टी के चूल्हे पर। प्रसाद तैयार होने के बाद सबसे पहले व्रती महिलाएं इसे ग्रहण करती हैं, उसके बाद इसे बांटा जाता है। साथ ही इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इसके अगले दिन सूर्यास्त के समय व्रती लोग नदी और घाटों पर पहुंच जाते हैं। जहां डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान सूर्यदेव को जल और दूध से अर्घ्य देते है। साथ ही इस दिन व्रती महिलाएं छठी मैया के गीत भी गाती हैं।

कहां से शुरू हुआ छठ पर्व

दरअसल महापर्व छठ की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी. इस पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण के द्वारा हुई थी. कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की. कथाओं के अनुसार कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे. वह हर दिन घंटों तक कमर जितने पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया करते थे. उनके महान योद्धा बनने के पीछे सूर्य की कृपा थी. आज के समय  में भी छठ में अर्घ्य देने की यही पद्धति प्रचलित है.

खरना की पौराणिक कथाएँ

दरअसल पौराणिक लोक कथा की माने तो जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर लौटे तो राम राज्य की स्थापना की जा रही थी। कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन ही राम राज्य की स्थापना हो रही थी, उस दिन भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्य देव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर उन्होंने सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। ऐसा माना जाता है, कि तब से लेकर आज तक यही परंपरा चली आ रही है।

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