छठ पर्व के दूसरे दिन इन बातों का रखें ध्यान, जानें क्या करना चाहिए और क्या नहीं

छठ पर्व के दूसरे दिन इन बातों का रखें ध्यान,  जानें क्या करना चाहिए और क्या नहीं

नई दिल्ली: आज देशभर में छठ पर्व का दूसरा दिन मनाया जा रहा है जिससे खरना कहा जाता है। खरना का अर्थ की बात करें तो इसका मतलब होता है शुद्धिकरण। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाने की परंपरा है। बता दें कि छठ पर्व का खासा महत्व बिहार में मनाया जाता है। खरना के दिन छठ पूजा का प्रसाद की परंपरा होता है। साथ ही इस दिन व्रती महिलाएं छठी मैया के गीत भी गाती हैं।

इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और छठी माता का प्रसाद तैयार करती है। इस दिन गुड़ की खीर बनती है वो भी मिट्टी के चूल्हे पर। प्रसाद तैयार होने के बाद सबसे पहले व्रती महिलाएं इसे ग्रहण करती हैं, उसके बाद इसे बांटा जाता है। साथ ही इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इसके अगले दिन सूर्यास्त के समय व्रती लोग नदी और घाटों पर पहुंच जाते हैं। जहां डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दौरान सूर्यदेव को जल और दूध से अर्घ्य देते है। वहीं इस खरना में कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिसके बारे में  आज हम आपको बताते है। 

क्या करें और क्या ना करें

•   दरअसल छोटे बच्चे बिना हाथ धोएं गंदे हाथों से खरना के सामान को छू लेते है जिसकी वजह से अशुद्धू हो जाता है इसलिए इस प्रदान को प्रयोग में ना ले।

•             पूजा में बनने वाला प्रदान को पहले ना बांटे।

•             खरान के सामान में प्याज और लगसुन का सेवन ना करें।

•             खरान में सफाई का खास ध्यान रखें।

•             बिना होथ धोए खरान का सामान ना बनाएं।

•             छठ पर्व में महिलाओं को पलंग पर नहीं सोना चाहिए।

•             प्रसाद में हमेशा ऐसे स्थान पर बनाना चाहिए, जहां रोजमर्रा का खाना न बनता हो।

•             खरना का प्रसाद बनने के बाद इसे सबसे पहले व्रती ग्रहण करें।

•             व्रती को शांत जगह पर बैठकर खरना का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

•             सूर्य को अर्घ्य दिए बिना कुछ खाना पीना नहीं चाहिए।

•             छठ पूजा के दौरान घर में झगड़ा न करें।

•             खासतौर पर व्रती को किसी को भी अपशब्दन नहीं बोलना चाहिए।

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