मोची-नाई और कुम्हार जैसे कारिगरों की बदलेगी पहचान! नाम बदलने को लेकर संसदीय समिति ने दिए सुझाव

मोची-नाई और कुम्हार जैसे कारिगरों की बदलेगी पहचान! नाम बदलने को लेकर संसदीय समिति ने दिए सुझाव

Parliamentary Committee Proposal:उद्योग संबंधी संसदीय स्थाई समिति ने पीएम विश्वकर्मा योजना को लेकर अहम सुझाव दिए हैं। समिति का कहना है कि मोची, जूता बनाने वाले और नाई जैसे पेशों को जाति से जोड़कर देखने के बजाए उनके कौशल और पेशे के आधार पहचान होनी चाहिए।  

समिति ने यह भी कहा कि सरकार पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पेशों के नामों में बदलाव कर उन्हें अधिक समावेशी और पेशेवर बनाया जाना चाहिए, ताकि योजना को समान रूप से पूरे देश में स्वीकार्य हो सके।

संसदीय समिति का प्रस्ताव

संसदीय समिति के मुताबिक वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में इस योजना के लिए आवंटन घटाकर करीब 3,860.89 करोड़ रुपए कर दिया गया है। जबकि 2025-26 में यह लगभग 25,100 करोड़ रुपए था। समिति का तर्क है कि योजना की लोकप्रियता और पंजीकरण की ज्यादा संख्या को देखते हुए बजट में कटौती चिंताजनक है और इसकी तत्काल समीक्षा की आवश्यकता है। समिति ने यह भी कहा कि योजना में कई ऐसे नाम हैं, जिन्हें कई क्षेत्रों में जाति से जोड़ा जाता है। इससे योजना की व्यापक स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। इन पेशों के नाम बदलकर कार्य आधारित नाम दिए जाने चाहिए।

विशेषज्ञों की क्या है राय

समिति के अनुसार, जाति अथवा क्षेत्र-विशेष से जुड़े कार्य नामों को तत्काल तर्कसंगत बनाया जाए और उनकी जगह पेशे-निरपेक्ष कार्य आधारित नाम दिया जाए। जैसे मोची के स्थान पर जूते का कारीगर, कुम्हार को सिरेमिक और नाई के स्थान पर व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता नाम दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का परिवर्तन कारीगरों को सम्मानजनक पहचान मिल सकती है और उन्हें नए उद्दमियों के रूप में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। 

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