
नई दिल्ली: नौकरी करने वाले लोगों को संडे का इंतजार रहता है ताकि वो अपनी परिवार के साथ समय बीता सकें लेकिन संडे की छुट्टी का इतिहास कहा से शुरू हुआ है इसकी जानकारी ज्याद लोगों को नहीं है। तो आज हम आपको संडे के इतिहास के बारे में बताएंगे कि संडे की छुट्टी कब से मिलने शुरू हुई।
संडे की छुट्टी का इतिहास
दरअसल रविवार का दिन सप्ताह का आखिरी दिन होता है। वहीं संडे की छुट्टी पर 1986 में मान्यता दी गई थी और इस छुट्टी का कारण ब्रिटिशर्स को माना जाता है। कहा जाता है कि 1843 में अंग्रेजों के गवर्नर जनरल ने सबसे पहले इस आदेश को पारित किया था। ब्रिटेन में सबसे पहले स्कूल बच्चों को रविवार की छुट्टी देने का प्रस्ताव दिया गया था। इसके पीछे कारण दिया गया था कि बच्चे घर पर रहकर कुछ क्रिएटिव काम करें।
इसके अलावा कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारत में बड़ा मजदूर वर्ग सातों दिन काम करते थे। लगातार काम करने से मजदूरों की हालत बिगड़ जाती थी। इतना ही नहीं, इन्हें खाना-खाने के लिए लंच का समय भी नहीं दिया जाता था। इसके बाद करीब 1857ई. में मजदूरों के नेता मेघाजी लोखंडे ने मजदूरों के हक़ में आवाज उठाई थी और कहा गया कि सप्ताह में एक दिन ऐसा होना चाहिए जब मजदूर आराम करने के साथ-साथ खुद को वक्त दे सके। वहीं 10 जून, 1890 को मेघाजी लोखंडे का प्रयास सफल हुआ और अंग्रेजी हुकूमत को रविवार के दिन सबके लिए छुट्टी घोषित करनी पड़ी।
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