
नई दिल्ली: दुनिया में लगातार गिरता जलवायु का स्तर लोगों के लिए एक गंभीर चिंता का विशेष बनता जा रहा है। शोधकर्ता भी लगातार जलवायु परिवर्तन पर चेतावनी दे रहे है। ऐसे में दुनिया के बड़े-बड़े ग्लेशियर लगातार पिघल रहे है। एक रिपोर्ट के अनुसार, धरती पर इतनी गर्मी बढ़ गई है कि आर्कटिक की समुद्री बर्फ 2050तक गायब हो जाएगी।
तेजी से पिघलते ग्लेशियर
इंटरनेशनल क्रायोस्फीयर क्लाइमेट इनिशिएटिव रिसर्च नेटवर्क की रिपोर्ट में अनुसार, इसी साल मार्च में पूर्वी अंटार्कटिका में बारिश हुई, जिसका कारण हवा का तापमान असामान्य रूप से गर्म होना था। ऐसे में गर्मियो के दौरान ग्लेशियर का 5हिस्सा भी खो दिया है। वहीं सितंबर में ग्रीनलैंड ने साल के उस समय पिघलने का नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं पृथ्वी के आठ सबसे गर्म साल देखने के बाद इस बात के प्रमाण मिलते है कि दुनिया के सभी बर्फीले क्षेत्र बहुत तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इनके पिघलने की जो उम्मीद की थी, ये दर उससे कहीं ज्यादा है।
बिना गर्मी बर्फ से बचने का कोई रास्ता नहीं
एक रिसर्चर का कहना है कि जैसे वार्मिंग को 1.5डिग्री सेल्सियस तक रखने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है, वैसे ही बिना बर्फ के गर्मी से बचने का कोई विश्वसनीय रास्ता नहीं है। ऐसे में रिपोर्ट को UN क्लाइमेट समिट की शुरुआत के साथ ही रिलीज़ किया गया। यह समिट 18नवंबर तक मिस्र के शर्म अल-शेख में चलेगा। सोमवार शाम को, आर्कटिक कैंपेनर्स और उस इलाके में रहने वाले युवाओं ने समुद्री बर्फ के खत्म होने पर ध्यान आकर्षित करने के लिए एक मीडिया ईवेंट भी किया था। उसमें एक व्यक्ति का कहना है कि हमने कुछ ऐसा देखना शुरू कर दिया है जिसे बचाया नहीं जा सकता है, लेकिन COP27वार्ता, गर्मियों की समुद्री बर्फ को बचाने के लिए बहुत अहम साबित होगी।
मल्टी ईयर सी आइस पर मंडरा रहा खतरा
अगर गर्मियों में समुद्री बर्फ खत्म हो जाती है, तो मल्टी इयर सी आइस (multiyear sea ice) भी नहीं रहेगी। यह वो समुद्री बर्फ होती है जो साल-दर-साल समुद्र में बनी रहती है। शोघकर्ता का कहना है कि इसका उस क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। वहां रहने वाले करोड़ों जीवन प्रभावित होंगे जो बढ़ते क्षरण का सामना कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस दशक में दुनिया को 2005के स्तर से कार्बन-डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को आधा कर देना चाहिए और 2050तक शून्य तक पहुंचना चाहिए, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोका जा सके। लेकिन अगर यह हासिल भी हो जाता है, तो दुनिया के बर्फ से ढके क्षेत्र 2040और 2080के बीच किसी बिंदु पर जाकर स्थिर होना शुरू होंगे। ग्लेशियरों का पिघलना एक सदी से ज्यादा समय तक जारी रहेगा, जबकि 2200तक धीमा होगा।
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