सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, कहा- पति-पत्नी दोनों मिलकर करें घर का काम

सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, कहा- पति-पत्नी दोनों मिलकर करें घर का काम

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि आज के समय में घर के काम सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि पति को भी बराबर भागीदारी निभानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक जीवनसाथी चुन रहे हैं। यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने उस समय की, जब एक व्यक्ति ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की थी। यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।

हाई कोर्ट ने फैसले को किया था रद्द

दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने पहले पति को तलाक दे दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया था। इसके बाद पति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान पति के वकील ने बताया कि दोनों के बीच सुलह की कोशिश (मेडिएशन) भी हो चुकी है, लेकिन वह असफल रही। दंपति की शादी 2017 में हुई थी और उनका एक 8 साल का बेटा भी है।

2019 से दोनों अलग रह रहे हैं। जब कोर्ट ने पूछा कि क्रूरता का आधार क्या है, तो पति के वकील ने कहा कि पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं था और वह खाना नहीं बनाती थी। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि खाना बनाना, सफाई करना या कपड़े धोना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं है।

बेंच ने दिया संकेत

कोर्ट ने कहा कि आज के दौर में पति-पत्नी दोनों को मिलकर घर के काम करने चाहिए। सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी खाना नहीं बनाती, इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। बेंच ने यह भी संकेत दिया कि कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला सही हो सकता है। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों पति और पत्नी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है, ताकि मामले को बेहतर तरीके से समझा जा सके। यह टिप्पणी समाज में बदलते समय और पति-पत्नी के रिश्तों में बराबरी के महत्व को उजागर करती है।

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