छठ पूजा के मौके पर बिहार के इस मंदिर में लगता है लोगों का ताता, इस तरह की जाती है भव्य पूजा

छठ पूजा के मौके पर बिहार के इस मंदिर में लगता है लोगों का ताता, इस तरह की जाती है भव्य पूजा

नई दिल्ली: छठ महापर्व के अवसर पर बिहार के औरंगाबाद जिले के देव में स्थित विश्व विख्यात शुरू मंदिर में आस्था का महा सैलाब उमड़ता है। देश के कई राज्यों से लाखों लोग सूर्य मंदिर परिसर स्थित तालाब में छठ व्रत करने आते है। वहीं बिहार में एक ऐसा मंदिर मौजूद है जिसमें छठ व्रत करने का विशेष महत्व है। नहाए-खाए से शुरू होकर पारण के दिन तक यहां चार दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है।

राजा ऐल ने त्रेता में कराया था निर्माण

मंदिर के एक शिलालेख के मुताबिक यह मंदिर लगभग ढ़ाई लाख वर्ष पुराना है। इसका निर्माण इला के पुत्र राजा ऐल ने त्रेतायुग में कराया था।  मान्यता है कि राजा कुष्ठ रोग से पीड़ित थे। एक बार शिकार करते हुए इसी इलाके में पहुंच गए।  यहां गड्ढे में पानी मौजूद था।  राजा ने गड्ढे के पानी से अपने शरीर पर लगे गन्दगी  की सफाई की।  कहा जाता है कि जहां जहां उन्होंने गड्ढे के पानी से सफाई की, उस इलाके का कुष्ठ रोग भी ठीक हो गया। उसी रात राजा ऐल को सपना आया कि गड्ढे के नीचे मूर्तियां है।  उन मूर्तियों का निकलवा कर मंदिर बनवा कर स्थापित कराया जाए।  इसी से प्रभावित होकर उन्होंने यहां मंदिर का निर्माण कराया।

कोनार्क की तर्ज पर देवार्क भी कहा जाता है

इस मंदिर को कोणार्क मंदिर की तर्ज पर देवार्क की भी कहा जाता है। छठ पर्व के मौके पर कार्तिक महीने में लगभग 12 लाख से ज्यादा लोग यहां जुट कर पूजा करते हैं। बिहार से सीमावर्ती राज्य झारखंड, बंगाल, उत्तर प्रदेश के अलावे उन सभी राज्यों से श्रद्धालु यहां आते हैं जहां छठ मनाया जाता है। देव का सूर्य मंदिर छोटे से प्रखंड के मुख्यालय में स्थित है जहां आज तक धर्मशाला और होटल की कमी है । बावजूद इसके आस्था से बंधे लाखों लोग यहां पहुंचते हैं।  स्थानीय गांव वाले यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं कि रहने और भोजन का प्रबंध करते हैं।  महीनों पहले गांव में कमरों की बुकिंग हो जाती है।

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