Success Story: कभी पढ़ाई में कमजोर समझे जाने वाले किरढान गांव के अनिल कसाना आज देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में शिक्षा की नई मिसाल बन चुके हैं। झुग्गी-बस्तियों के बच्चों के जीवन में उजाला भरने वाले अनिल कसाना की कहानी संघर्ष, समर्पण और परिवर्तन की अनोखी मिसाल है। गांव किरढान में जन्मे अनिल कसाना की शुरुआती पढ़ाई मदर टेरेसा कॉन्वेंट स्कूल (भट्टू) में हुई, जबकि 12वीं तक की शिक्षा ऐपेक्स पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उनका परिवार हिसार आ गया, जहां उन्होंने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. किया। अनिल बचपन से ही पारंपरिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप होशियार विद्यार्थी नहीं माने गए। अंग्रेजी विषय उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बीटेक के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचे और कई परीक्षाएं भी पास की, लेकिन तभी उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
2022 में अनिल के कार्यों की चर्चा अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नवरसका में हुई। 2024 में न्यूयॉर्क के वर्ल्ड वाटर हव सस्ता डेलिगेशन ने हिसार का दौरा किया और अनिल कसाना को उनके योगदान के लिए बेटर डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (अमेरिका) नियुक्त किया। झुग्गियों के बच्चों से मिली प्रेरणा दिल्ली में अनिल ने सड़कों और बस्तियों में रहने वाले उन बच्चों को देखा जो भिक्षा मांगने या कबाड़ बीनने को मजबूर थे। यह दृश्य उनके दिल को छूगया। उन्होंने नौकरी की राह छोड़कर इन बच्चों की जिंदगी बदलने का संकल्प लिया। वापस हिसार लौटकर उन्होंने 2018 में प्रयत्न फाउंडेशन की स्थापना की और झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आज उनकी इस संस्था से डेढ़ सौ से अधिक बच्चे जुड़े हैं। बच्चों की अनोखी सरकार और शिक्षा पद्धति 'प्रयत्न फाउंडेशन' में बच्चे खुद अपनी सरकार चलाते हैं, पैसों का लेनदेन यहां बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता है। बच्चे वेबसाइट डिजाइनिंग, ऐप डेवलपमेंट और विदेशी भाषाएं-जैसे जर्मन-भी सीख रहे हैं।
यह अनोखा शिक्षा मॉडल
यह अनोखा शिक्षा मॉडल न केवल भारत में बल्कि दुनिया के आठ देशों में चर्चा का विषय बन चुका है अंतरराष्ट्रीय पहचान 2019 में दिसंबर माह में लंदन से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर जॉर्ज मिगन भारत आए खुद करते हैं, और बड़े बच्चे छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं। यहां बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता है। बच्चे वेबसाइट डिजाइनिंग, ऐप डेवलपमेंट और विदेशी भाषाएं जैसे जर्मन भी सीख रहे हैं। यह अनोखा शिक्षा मॉडल न केवल भारत में बल्कि दुनिया के आठ देशों में चर्चा का विषय बन चुका है अंतरराष्ट्रीय पहचान 2019 में दिसंबर माह में लंदन से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर जॉर्ज मिगन भारत आए और अनिल कसाना के साथ मिल गेट क्षेत्र में एक माह तक कार्य किया। बाद में आईआईटी और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर और प्रिंसिपल भी इस मुहिम से जुड़े।
आज बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की मिसाल बन चुका है।
लंदन में दो बार आमंत्रण 2024 में यूनिवर्सिटी ऑफ इंस्ट लंदन के प्रतिनिधि भारत आए और प्रयत्न फाउंडेशन के साथ अनुबंध किया। उनकी उपलब्धियों से प्रभावित होकर 2025 में अनिल को दो बार लंदन आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में अपना वक्तव्य दिया। गांव और समाज का सहयोगः अनिल कसाना के इस अभियान को गांव किरढान के लोगों ने भी अपनाया। गांव के सरपंच राजेश भीमचार और ग्रामीणों ने संस्था के लिए 5 लाख की सहायता दी। गांव के किसान महावीर राहड़ अनिल के आदर्श माने जाते हैं। संस्था को मजबूती देने में डॉ. रमेश भाटी, सब इंस्पेक्टर देवेंद्र रोहिल्ला, साइंटिस्ट देवेंद्र सिंह दहिया सहित कई लोगों का अहम योगदान है। हिसार कमिश्नर अशोक गर्ग और प्रसिद्ध शिक्षक प्रदीप सर भी कई बार संस्था के बच्चों से मिलने पहुंचे हैं। नायक वही जो समाज को रोशनी देः आज प्रयन फाउंडेशन शिक्षा की नई परिभाषा लिख रहा है। अनिल कसाना साबित कर चुके हैं कि असफलता ही असली सफलता की पहली सीढ़ी होती है। जो कभी अंग्रेजी पढ़ने से डरता था, वही आज बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की मिसाल बन चुका है।
प्रयत्न फाऊडेशन गरीब जरुरत मंद बच्चों की पढा रही है जर्मनी भाषा सिखाई जा रही है
हिसार के अनिल कसाना ने कहा कि हमारा उद्देश्य है बच्चों को सही टैकनीकल शिक्षा देकर उन्हें कामयाबी की मंजिल पर पहुंचना है। अनिल ने बताया कि वे दस जमा दो की कक्षा में फेल हो गए है उन्होंने हिसार मे आकर जमा दो की परीक्षा पास की और इसके बाद में बी टैक की डिग्री हासिल की थी। अनिल ने कहा कि प्रयत्न फाउंडेशन में दौ सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है जर्मन भाषा सीख रहे है। जिन बच्चों का पढ़ाई में मौका नही मिलता उन्हें उनका प्रयास यही रहता है कि उन्हें पढ़ाई करवाना है। वे अभी तक पांच से ज्यादा बच्चों को मैन स्ट्रीम में लेकर आए है। उनके यहां खास बात इस संस्था में सीनियर बच्चे ही जूनियर बच्चो को पढाई करते है वे अकेले एक टीचर है साथ उनका सेवानिवृत डीएस डबलू देवेंद्र डा रमेश भाटी उनको हर तरीके से पूरा स्पोट करते है। उनका उद्देश्य बच्चो अमीर बनाना सीखना नहीं है बल्कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उन्हें कामयाब करना है। उन्होंने बताया कि जार्ज मेगन दुनिया में सबसे लंबा चलने का काम किया था और रिकॉर्ड भी बनाया था वे विदेश से इंडिया आए थे और वे इन बच्चों के साथ रह कर गए थे।
हर साल दो पार्टियों के बीच चुनाव कराये जाते है
यहाँ हर साल चुनाव किए जाते है यहा दो पत्तियां बनती है एक पार्टी चाणक्य द्वार व दूसरी अशोका द्वारा पार्टी है इन दोनो पार्टियों के बीच चुनाव कराये जाते है। यहा बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाते है दोनो पार्टियों में बच्चे छात्र वोट डालने का काम करते है। जिस प्रकार से सरकारी सिस्टम से चुनाव करवाए जाते है उसी तरह चुनाव होते है और जो पार्टी जीत जाती है उनकी सरकार बनाई जाती है इसके बाद पक्ष विपक्ष पार्टियां यहा अपना काम करती है। अनिल ने कहा कि जर्मनी, जैपनिज, नीट की परीक्षा की तैयारी करवाई जाती है संस्कृत भाषा सिखाई जाती है अभी चार बच्चे जर्मनी जाने की तैयार कर रहे है। कुछ बच्चे आईआईटी की तैयारी कर रहे है। उन्होंने कहा उनका संस्था को सरकार की तरफ से उन्हें किसी तरह की कोई मदद नही मिलती है एक रुपये एक दिन का देकर कोई समाजसेवी मेंबर बन सकता है। उन्होंने कहा कि अच्छी एजुकेशन के लिए नीट की परीक्षा की तैयारी करवाई जा रही है। अनिल ने कहा कि जो बच्चे मुखय धारा में नहीं थे उन बच्चो को पढाते है हमारे दस जमा के बडे बच्चो एजुकेशन संस्थानो में अडशीन करवाया जाता है वे एजुकेशन संस्थान भी उन्हें निशुल्क पढाने का काम करते है। उनकी संस्था की मैनेजमैंट सीनियर बच्चो के माध्यम से की जाती है खाने पीने की चीजें जूनियर को पहले दी जा जाती है। अनिल के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन ने हमारे से संपर्क किया है उनकी टीम भी यहा आई थी। उन्होंने गन्ने की खोई से ईंटें तैयार की है इस ईट को चूना मिलाकर तैयार करते है। हमारे ईट के डिजाइन को देखने के लिए लंदन से टीम भी आई थी।
ये बच्चे जर्मनी जाएंगे
इस संस्था में दस जमा दो कक्षा से पास बच्चे गौरव, लककी, पार्वती तीनो से जर्मनी सिख ली है वे जल्द ही आगे लंदन में जाएगे। याचना, लक्ष्मी, अंशु, पूनम, खुशी चंदा नीट की परीक्षा की तैयार कर रहे है जबकि प्रिंस विकास चेतन आईआईटी की तैयारी कर रहे है। सौरभ यहा से पढ कर फरीदाबाद के वाई एमसी में बीटेक की पढाई कर रहा है।
कैसे चलती है प्रयत्न फाउंडेशन
प्रयत्न फाउंडेशन से अनिल ने बताया संस्था से में एक रुपया एक दिन के लिए लेकर मेंबर बनाया जाता है पूरे साल भर एक व्यक्ति तीन सौ पैसठ रुपये देते है। आज प्रत्यन फाउंडेशन में एक में एक हजार मैंमबर संस्था से जुडे है।उन्होने बताया कि संस्था की पढाई की देखरेख के लिए लगभग एक साल में चार लाख रुपये का खर्चा है जो सामाजिक लोगों द्वारा किया जाता है। इसका संस्था का लेखा जोखा लेने देने का काम भी स्कूल के बच्चे करते है।