
नई दिल्ली: अभी तक हमने जितनी बार भी रास्ते में लगी ट्रैफिक लाइट्स को देखा होगा वो हमेशा ऊपर की ओर होती है। जिसे देखने के लिए हमें हर बार सर उठाना पड़ता है। लेकिन एक देश ऐसा भी है, जहां ट्रैफिक लाइट्स ऊपर की ओर नहीं बल्कि पैरों के नीचे लगी रहती हैं और इसके पीछे एक दिलचस्प वजह है।
दुनिया के लगभग हर देश में रोड पर ट्रैफिक लाइट आपको ऊपर की ओर मिलेंगी। लेकिन ऐसा दक्षिण कोरिया में नहीं है। जैसे की आप जानते है कुछ सालों में दुनिया काफी बदल चुकी है ज्य़ादातर पुरानी चीज़ों को नई चीज़ें से रिप्लेस किया जा रहा है। मसलन लोग अब मिलने-मिलाने के बजाय फोन पर बात करना पसंद करते है। बता दें कि फिजिकल से ज्यादा डिजिटल दोस्तों का चलन विश्व भर में हमें हर तरफ देखने को मिल रहा है। फोन की यहीं लत दुनिया के हर कौने में फैल गयी है। लेकिन इस ट्रेंड के कारण हर मिनट कई लोग अपनी जान से हाथ धो बेठते है। इसी विषय पर दक्षिण कोरिया में एक बरसों पुराना ट्रेंड को बदलने पर विचार किया गया जिसमें फोन में व्यस्त लोगों के लिए ट्रैफिक लाइट्स को ऊपर की ओर ना लगाकर पैरों के नीचे लगाई। इस सिसटम को एक ट्रायल प्रोजेक्ट के अंतरगत सियोल के कुछ हिस्सों में जारी किया गया।
ये दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आपको देखने को मिलेगा कि किस तरह से रोड पर लगी ट्रैफिक लाइट्स को देख कर लोग सड़क क्रास कर रहे है। आपको सड़क पर लाल और हरी रंग की LED लाइट्स दिखेंगी जो बिलकुल आम ट्रैफिक लाइट्स की तरह है। यह उन लोगों के लिए बहुत लाभदायक सिध्द हुआ है जो ज्य़ादातर आपना समय फोन पर बिताते है।
मोबाइल की वजह से बदल गई प्लेसिंग
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार दक्षिण कोरिया में ट्रैफिक लाइट्स का ये निराला सिसटम साल 2019 में पहली बार प्रयोग लया गया था। इसके पीछे की मुख्य वजह यहां पैदल क्रॉसिंग करने वाले लोगों के साथ बढ़ती दुर्घटनाएं थीं। अब तक करीब सियोल के 25 ज़िले में ये लाइट्स लगाई जा चुकी हैं। ट्रैफिक लाइट का पैरों की तरफ होने के कारण वे मोबाइल देखते-देखते भी रोड़ सुरक्षित पार कर सकते है।
बता दें किकोरिया सरकार की ओर से एक अलर्ट सिस्टम भी बनाया गया है, जिससे रोड क्रॉस कर रहे लोगों के फोन पर मैसेज दिया जाता है।इस मैसेज में उन्हें ट्रैफिक लाइट से जुड़ी की जानकारी दी जाती है।
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