Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद मार्च से पहले एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों (जैसे पेपर लीक) की ज़िम्मेदारी लेती है, या अगर सांसद उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा उठाया जाएगा, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।
सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि वांगचुक ने सरकार के आगे अपनी तीन शर्तें रखी है। उन्होंने कहा कि मैं 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर दूंगा अगर।
1. सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की ज़िम्मेदारी लेती है या
2. मैं और CJP की लीडरशिप संसद तक पहुंचते हैं जहां अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता हमें भरोसा दिलाते हैं कि वे अब संसद में यह मुद्दा उठाएंगे या
3. अगर मेरी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा करना मुमकिन नहीं होता है, तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर ऊपर बताया गया भरोसा दिलाएं। सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी नजरबंदी से, जहां मेरे आने-जाने, बोलने और बातचीत करने की आज़ादी पर रोक लगी हुई है।
इससे पहले रविवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी कहा था कि वांगचुक अपनी भूख हड़ताल तब खत्म करेंगे जब "राजनीतिक नेता सफदरजंग अस्पताल में उनसे मिलेंगे" और उन्हें भरोसा दिलाएंगे कि वे "शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा" उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सोनम कल अपनी भूख हड़ताल तब खत्म करेंगे जब राजनीतिक नेता सफदरजंग अस्पताल में उनसे मिलें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे संसद के इस सत्र में शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, और इस सत्र का मुख्य मुद्दा शिक्षा में जवाबदेही और सुधार होगा।
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, अगर संसद के ज़रिए वह जवाबदेही तय नहीं होती है, तो वह अपना अनशन जारी रखेंगे। अस्पताल में दो दिन रहने के बाद भी उन्होंने अपनी भूख हड़ताल नहीं तोड़ी। इस बीच कि कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा संसद तक प्रस्तावित मार्च की खबरों के चलते अधिकारियों ने रविवार को दिल्ली में जंतर-मंतर के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए। पुलिसकर्मी विरोध स्थल के आसपास नज़र रखे हुए देखे गए।