सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को झटका, अदालत ने कहा - शराब पर कानून बनाने का अधिकार राज्य के पास

सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को झटका, अदालत ने कहा - शराब पर कानून बनाने का अधिकार राज्य के पास

Supreme Court Verdict On Lioqur Policy: शराब पर कानून बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 23 अक्टूबर यानी बुधवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने औद्योगिक शराब पर केंद्र सरकार के अधिकार को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि औद्योगिक शराब पर कानून बनाने का अधिकार राज्य के पास है। केंद्र सरकार के पास शराब के उत्पादन पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है। बता दें कि इस मामले की सुनवाई सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच कर रही थी। बेंच में कुल नौ न्यायाधीश थे।

क्या कहा गया फैसले में?  

इस मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि शराब के उत्पादन से जुड़े कानून बनाने का अधिकार राज्य से नहीं छिना जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य के पास शराब उत्पादन और सप्लाई को लेकर भी नियम बनाने का अधिकार है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला 8:1 के अनुपात से सुनाया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हृषिकेश रॉय, एएस ओका, जेबी पारदीवाला, उज्ज्वल भुइयां, मनोज मिश्रा, एससी शर्मा और एजी मसीह फैसले के पक्ष में थे। वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने फैसले पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास ही शराब पर कानून बनाने का अधिकार होना चाहिए।                                         

32 साल पुराना फैसला पलटा गया

शराब नीति मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 32 साल पुराने फैसले को पलट दिया है। बता दें कि 1990 में सात न्यायाधीशों की बेंच ने सिंथेटिक्स और केमिकल्स मामले में फैसला सुनाया था। उस वक्त फैसला केंद्र सरकार के पक्ष में सुनाया गया था। तब सुनवाई करते हुए सात जजों की बेंच ने कहा था कि राज्य के पास औधोगिक शराब पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है। साथ ही कहा था कि राज्य सरकार शराब को लेकर कानून बनाने का दावा नहीं कर सकते हैं।                                                          

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