
Phool Singh Baraiya Controversy: मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के विवादित बयान पर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बेटियां उनके लिए देवी के समान हैं और बेटियों को जाति या समाज के आधार पर बांटना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।
हमारी बेटियां हैं देवी का रूप- शिवराज सिंह
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारी संस्कृति और परंपरा में बेटियों को मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का रूप माना गया है। अगर कोई देवी का रूप है, तो वह हमारी बेटियां हैं। चाहे कोई नेता हो या आम व्यक्ति, किसी भी जाति या समुदाय की बेटियों को आप कैसे बांट सकते हैं? उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान बेहद शर्मनाक हैं और इन्हें कभी नहीं दिया जाना चाहिए। शिवराज ने यह भी कहा कि ऐसे बयान उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत दुख पहुंचाते हैं।
फूल सिंह बरैया का विवादित बयान
बता दें कि भंडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने एक बयान में रेप जैसे जघन्य अपराध को जाति और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ दिया था। उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का जिक्र करते हुए कहा था कि इन समुदायों की महिलाओं को एक “विकृत विश्वास प्रणाली” के कारण ज्यादा निशाना बनाया जाता है। उन्होंने रुद्रयामल तंत्र नामक किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ अपराधियों का मानना है कि खास जातियों की महिलाओं के साथ यौन हिंसा करने से उन्हें तीर्थयात्रा के बराबर पुण्य मिलता है।
बरैया ने रेप को दिया बढ़ावा
विधायक बरैया यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी दावा किया कि रेप की घटनाएं अक्सर समूह में होती हैं और उन्होंने शिशुओं से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चार महीने और एक साल की बच्चियों के साथ होने वाले अपराध भी इसी विकृत मानसिकता का नतीजा हैं। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं को सुंदरता के आधार पर जज करने की बात कही और कहा कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर चलता है और उसे कोई खूबसूरत लड़की दिख जाए, तो उसका दिमाग भटक सकता है।
भाजपा ने की कड़ी निंदा
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस विधायक के बयान की कड़ी निंदा की है और माफी की मांग की है। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने भी इसे महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और खतरनाक सोच करार दिया है। कुल मिलाकर, ये मामला अब सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक सोच से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
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