
Delhi Metro: दिल्ली की रिंग रोड्स को हिंदी में ‘मुद्रिका’ कहा जाता है, यानी रिंग। पिंक लाइन के साथ अब दिल्ली में चार परतों वाली सर्कुलर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बन गई है। शहर में पहले से ही इनर रिंग रोड और आउटर रिंग रोड हैं, जो मुख्य हिस्सों को घेरे हुए हैं। इसके अलावा, पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेस वे एनसीआर का बड़ा बाहरी रिंग बनाते हैं।
पिंक लाइन लगभग 59 किलोमीटर लंबी है और इसमें मजलिस पार्क, नेताजी सुभाष प्लेस, राजौरी गार्डन, आईएनए, लाजपत नगर और मयूर विहार जैसे इलाकों को जोड़ा गया है। यह लाइन शहर के केंद्र से गुजरने के बजाय उपनगरों को आपस में जोड़ती है, जिससे ट्रैफिक की भीड़ से बचा जा सकता है।
रेडियल मेट्रो रूट्स से अलग
दिल्ली मेट्रो की यह ऑर्बिटल लाइन पहले के रेडियल मेट्रो रूट्स से अलग है, जो आम तौर पर उपनगरों को सिटी सेंटर से जोड़ते हैं। पिंक लाइन की डिजाइन शहर की बढ़ती आबादी और उपनगरों के बीच आवाजाही की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। दिल्ली का सर्कुलर ट्रांसपोर्ट विचार मेट्रो से कई दशक पहले शुरू हुआ था। 1960-70 के दशक में इनर रिंग रोड और 1980 में आउटर रिंग रोड का निर्माण हुआ। इसके अलावा, 1970 और 1980 के दशक में दिल्ली रिंग रेलवे भी बनाई गई थी, जो अब जर्जर अवस्था में है और कम यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं।
एनसीआर में ट्रैफिक होगा कम
एनसीआर में ट्रैफिक को कम करने के लिए पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया। ये एक्सप्रेसवे बड़े वाहनों को दिल्ली के congested रोड्स से दूर ले जाते हैं। इस तरह, दिल्ली में सड़कें, मेट्रो और हाईवे तीनों सर्कुलर लेयर में शहर और एनसीआर को जोड़ते हैं। यही वजह है कि दिल्ली को अब सही मायने में ‘लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स’ कहा जा सकता है।
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