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केजरीवाल और सिसोदिया का ‘सत्याग्रह’, कोर्ट कार्यवाही के बहिष्कार के बीच राजघाट पहुंचे

केजरीवाल और सिसोदिया का ‘सत्याग्रह’, कोर्ट कार्यवाही के बहिष्कार के बीच राजघाट पहुंचे

Justice Swarn Kanta Controversy: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया मंगलवार को राज घाट पहुंचे। दोनों नेताओं ने ‘सत्याग्रह’ का रास्ता अपनाते हुए यह कदम उठाया। यह फैसला उन्होंने एक्साइज पॉलिसी मामले में कोर्ट की कार्यवाही का बहिष्कार करने के बाद लिया है। एक दिन पहले ही दोनों नेताओं ने साफ कर दिया था कि वे इस मामले में न तो अदालत में पेश होंगे और न ही उनकी तरफ से कोई वकील पेश होगा। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वे बापू का आशीर्वाद लेने के लिए दोपहर 12 बजे राजघाट जाएंगे।

वीडियो संदेश में केजरीवाल ने क्या कहा? 

वीडियो संदेश में केजरीवाल ने कहा कि वह महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलते हुए सत्याग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस केस में जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में न खुद पेश होंगे और न ही कोई वकील भेजेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे चलकर वह कानूनी विकल्प अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं।

सिसोदिया ने अपने पत्र में क्या लिखा? 

सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर इसी तरह का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने अपने पत्र में लिखा कि अब उनके पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। केजरीवाल ने अपने फैसले के पीछे दो मुख्य कारण बताए। पहला, उन्होंने अदालत में विचारधारा से जुड़े पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा ने उन पर आरोप लगाकर जेल भेजा, उसी से जुड़े मंचों से जज के संबंध रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष न्याय मिलना मुश्किल है।

गांधीवादी सिद्धांतों से प्रेरित कदम- AAP 

दूसरा कारण उन्होंने हितों के टकराव (Conflict of Interest) को बताया। केजरीवाल ने कहा कि इस मामले में सीबीआई उनके खिलाफ है और जज के बच्चे केंद्र सरकार में काम करते हैं। साथ ही सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta भी इस केस में सरकार की तरफ से पेश हो रहे हैं। हालांकि, केजरीवाल ने कहा कि कोर्ट जो भी फैसला देगी, वे भविष्य में उसे चुनौती देने का अधिकार रखते हैं। AAP ने इस फैसले को गांधीवादी सिद्धांतों से प्रेरित कदम बताया है।

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