Women Success Story: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के बेहट क्षेत्र के छोटे से गांव पिठौरी की बेटी साहिबा खान ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने उपजिलाधिकारी (SDM) का पद हासिल किया है। साहिबा की इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूरे जिले में खुशी का माहौल है।
बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा
जैसे ही साहिबा के चयन की खबर गांव पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। ग्रामीणों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी जाहिर की। गांव के लोगों का कहना है कि साहिबा की सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा है। साहिबा के पिता खालिद अली खान भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने बेटी की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल साहिबा की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सहयोग और दुआओं का नतीजा है। उन्होंने बताया कि साहिबा बचपन से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रही हैं और दूसरी कक्षा से लगातार अपनी कक्षा में अव्वल आती रही हैं।
क्या है उनकी सफलता का कारण
परिवार के अनुसार, साहिबा की मां ने बच्चों की शिक्षा और अच्छे संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया। साहिबा ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और मोबाइल फोन तथा अन्य अनावश्यक चीजों से दूरी बनाए रखी। यही अनुशासन उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। पिता ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान साहिबा रोजाना 16 से 18 घंटे तक पढ़ाई करती थीं। कई बार देर रात तक जागकर पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि जब भी रात में उनकी आंख खुलती, साहिबा किताबों के बीच पढ़ाई करती नजर आती थीं।
मामा का रहा अहम योगदान
साहिबा की सफलता में उनके मामा का भी अहम योगदान रहा। सहारनपुर में उनके कोचिंग संस्थान में ही साहिबा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। मामा ने उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा की सही रणनीति बनाने में भी मार्गदर्शन दिया। साहिबा की छोटी बहन उमामाह खान भी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने अलीगढ़ से एमटेक में टॉप किया है और वर्तमान में नोएडा की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं।
साहिबा को मिला पति का सपोर्ट
साहिबा की शादी हो चुकी है। उनके पति मोहम्मद ताबीज हसन 2024 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं। परिवार का कहना है कि ससुराल पक्ष ने भी उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया। साहिबा की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, परिवार का सहयोग और मजबूत इरादों के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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