कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति? जाने क्या है भगवान शिव और रुद्राक्ष का संबंध

कैसे हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति? जाने क्या है भगवान शिव और रुद्राक्ष का संबंध

Rudraksh:  देवो के देव महादेव कहे जाने वाले भगवान शिव और रूद्राक्ष का गहरा संबंध है। भगवान शिव को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित है। आपने भगवान शिव को रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए देखा होगा। भगवान शिव से जुड़े होने के कारण रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र माना जाता है। रुद्राक्ष को धारण करने मात्र से ही जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूस हो जाते है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसूओं से हुई थी। इसलिए इस भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। प्राणियों के कल्याण के लिए जब कई सालों तक ध्यान करने के बाद भगवान शिव ने आंखें खोलीं, तब आंसुओं की बूंदे गिरीं और धरती मां ने रुद्राक्ष के पेड़ों को जन्म दिया।

बता दें कि सदगुरु जग्गी वासुदेव महाराज के ईशा फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक, रुद्राक्ष एक पेड़ के सूखे बीज होते हैं, यह पेड़ दक्षिण पूर्व एशिया की कुछ खास जगहों पर उगता है। विज्ञान की भाषा में इस पेड़ को एलोकार्पस गनीट्रस के नाम से जाना जाता है। रुद्राक्ष दो शब्‍दों से मिलकर बना है- ‘रुद्र’ और ‘अक्ष’. ‘रुद्र’ शिव का नाम है और ‘अक्ष’ का मतलब है आंसू। यही वजह है कि इसे भगवान शिव का आंसू कहा जाता है।

कैसे निकलता है रुद्राक्ष

वहीं एलाओकार्पस गनिट्रस के पौधे में रुद्राक्ष निकलते हैं. ये पेड़ 18–24 मीटर लम्‍बे होते हैं जो खासतौर पर नेपाल, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के कई हिस्‍सों में पाए जाते है। भारत में इन पेड़ों की करीब 300 प्रजातियां है। इस पेड़ में लगने वाले फल की गुठती के रूप में होता है रुद्राक्ष। एलाओकार्पस गनिट्रस के पेड़ से जब फल पककर गिर जाते हैं तो इनका बाहरी हिस्‍सा धीरे-धीरे हटने लगता है। इसमें से ही रुद्राक्ष निकलता है।

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