All Party Meeting: संसद के मॉनसून सत्र से पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उस समय हंगामा हो गया, जब विपक्षी दलों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बैठक में बुलाकर गलत परंपरा अपनाई है। जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के कुछ बागी सांसदों ने खुद को नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल करने का दावा किया है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस विलय को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसके बावजूद इन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
कई विपक्षी दलों ने किया वॉकआउट
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बताया कि इस विरोध में कांग्रेस के साथ-साथ डीएमके, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दल शामिल हुए। सभी नेताओं ने बैठक छोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।
महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार ने एक ऐसे दल को बैठक में शामिल किया, जिसे अभी तक मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि संसद की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं, जबकि जिन 20 बागी सांसदों के विलय की बात की जा रही है, उसे अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है। महुआ मोइत्रा ने कहा कि जब तक स्पीकर आधिकारिक फैसला नहीं लेते, तब तक इन सांसदों को अलग दल का प्रतिनिधि मानना नियमों के खिलाफ है। इसी वजह से पूरे विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार किया।
मॉनसून सत्र से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
केंद्र सरकार ने सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा के लिए यह सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। लेकिन बैठक की शुरुआत ही विवाद के साथ हुई और विपक्ष के वॉकआउट से राजनीतिक माहौल गरमा गया। अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर है। यदि बागी सांसदों के विलय को लेकर कोई निर्णय आता है, तो उसका असर संसद की कार्यवाही और टीएमसी की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
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