क्या आपको पता है गिरफ्तारी के दौरान आम जनता के अधिकार, इस खबर में पढ़े पूरी जानकारी

नई दिल्ली: पुलिस को लेकर हमेशा लोगों में एक खौफ देखने को मिलता है। लोगों में डर बना है कि पुलिस आएंगे तो गिरफ्तारी होगी और फिर जेल जाना पड़ेगा। हालांकि इस देश में हर चीज को लेकर कानून बनाएंगे है फिर चाहे पुलिस द्वारा गिरफतारी हो या फिर लोगों का चालान काटने का बात हो। ज्यादातर लोगों को अपने कानूनी धिकार के बारे में नहीं पता होता है तो चलिए आज हम आपको उन कानून के बारे में बताते है। सबसे पहले बात करते है गिरफतारी की।
दरअसल पुलिस अपनी मनमर्जी से किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती, बल्कि उसे गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है। अन्यथा, गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाती है जिसमें पुलिस पर एक्शन भी लिया जा सकता है। यदि कोई पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह न सिर्फ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता मतलब सीआरपीसी का उल्लंघन माना जाता है, बल्कि यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21और 22 में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है। लिहाजा, मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर पीड़ित पक्ष संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
पुलिस को करना होगा कानून का पालन
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कानून के मुताबिक गिरफ्तार व्यक्ति की हर 48 घंटे के अंदर मेडिकल जांच होनी चाहिए।
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सीआरपीसी की धारा 57 के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं ले सकती है।
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हिरासत में रखने के लिए सीआरपीसी की धारा 56 के तहत मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी
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मजिस्ट्रेट इस संबंध में इजाजत देने का स्पष्ट कारण भी बताएगा।
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गिरफ्तार व्यक्ति को पूरा अधिकार होता है कि वो पुलिस जांच के दौरान कभी भी अपने अधिवक्ता से मिल सके है।
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साथ ही वह अपने अधिवक्ता और परिजनों से सामान्य बातचीत कर सकता है।
क्या कहती है सीआरपीसी की धारा 55 (1)
सीआरपीसी की धारा 55 (1)के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ख्याल पुलिस को रखना होगा। अगर पुलिस कानून का पुलिस पालन नहीं करती है तो व्यक्ति की गिरफ्तारी गैरकानूनी होगी और इसके लिए पुलिस के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
गिरफ्तारी को लेकर तो आम जनता के अधिकार
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पुलिस को गिरफ्तारी की वजह बतानी होगी।
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गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को वर्दी में होना चाहिए।
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और उसकी नेम प्लेट में उसका नाम साफ-साफ लिखा होना चाहिए।
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व्यक्ति को अधिकार होगा कि वो अपनी गिरफ्तारी की जानकारी अपने परिवार को दे सके।
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पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति का मेडिकल जांच कराना होगा।
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पुलिस किसी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं ले सकती।
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व्यक्ति को ये अधिकार है कि वो पुलिस जांच के दौरान कभी भी अपने वकील से मिल सके।
पुलिस बिना वारंट कब गिरफ्तार कर सकती है?
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दो परिस्थितियों में पुलिस आपको बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
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पहला, जब किसी ने कोई संगीन अपराध किया हो
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दूसरा जब पुलिस को ये शक हो कि वो इंसान कोई संगीन अपराध करने वाला है
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जब पुलिस को एक विश्वसनीय सूचना मिली हो या एक शिकायत हुई हो
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न्यायालय ने किसी को अपराधी करार दिया हो
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अगर पुलिस किसी के पास से चोरी की सम्पत्ति बरामद कर ले
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अगर कोई पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालता है
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अगर कोई सेना से भगोड़ा होने का संदिग्ध हो
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अगर भारत के बाहर आप किसी अपराध में संलिप्त हैं
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आप पूर्व में किसी अपराध के लिए दोषी घोषित किए गए हैं
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और आप ‘रिहा अपराधी’ सम्बन्धी नियमों का उल्लंघन करते हैं
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ऐसे में पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
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