130th Constitution Amendment Bill: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में पद से हटाने से जुड़े 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने शुक्रवार को अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। समिति ने कहा कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले हितधारकों से और चर्चा की जरूरत है। यह फैसला संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले लिया गया है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाला है। इससे पहले JPC ने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें पांच प्रमुख सिफारिशें शामिल थीं। शुक्रवार को इन सिफारिशों पर अलग-अलग मतदान भी शुरू हुआ था, लेकिन बाद में समिति ने रिपोर्ट को अपनाने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया।
दो सिफारिशों पर मतदान पूरा
JPC की अध्यक्ष और बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि बिल पर सभी पक्षों से और बातचीत की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है और सभी दलों को मिलकर इस पर विचार करना चाहिए। समिति के सदस्यों के अनुसार, दो सिफारिशों पर मतदान पूरा हो चुका था और तीसरी सिफारिश पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान रिपोर्ट को फिलहाल टालने का निर्णय लिया गया। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ बीजेपी के कुछ सदस्यों ने भी शुरुआती दो सिफारिशों के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन बहुमत के आधार पर वे सिफारिशें स्वीकार कर ली गईं।
JPC की सिफारिशों में क्या कहा गया?
JPC की प्रमुख सिफारिशों में कहा गया है कि अगर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर अपराध के आरोप में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्थायी रूप से हटाने के बजाय जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक पद से निलंबित किया जाए। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर संबंधित नेता को अदालत से राहत मिल जाती है या तय समय में मुकदमा आगे नहीं बढ़ता है, तो पद बहाल करने के लिए एक स्वचालित बहाली प्रावधान होना चाहिए।
विपक्ष ने किया विरोध
इसके अलावा समिति ने बिल में इस्तेमाल किए गए "गंभीर आपराधिक अपराध" शब्द की स्पष्ट परिभाषा देने की सिफारिश की है। इसके तहत ऐसे अपराध शामिल होंगे, जिनमें सजा पांच साल या उससे अधिक की जेल हो सकती है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल अगस्त में लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे। इन विधेयकों में गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार और 30 दिनों तक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया था। विपक्ष ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया था।
क्योंकि ये विधेयक संविधान में संशोधन से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होगी। JPC की रिपोर्ट मंजूर होने के बाद ही केंद्र सरकार आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी और संशोधन प्रस्ताव संसद में पेश किए जाएंगे। फिलहाल समिति की रिपोर्ट पर अंतिम फैसला टल गया है।
Also read: EPFO की नई योजना 'विश्वास 2026' शुरू, नियोक्ताओं को पुराने जुर्माने और विवाद निपटाने का मौका