
Maha Shivratri 2026: आज 15फरवरी 2026को पूरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की स्मृति में मनाया जाता है, जहां भक्त व्रत रखकर रात्रि जागरण करते हैं और शिव की आराधना में लीन रहते हैं। इस साल विशेष रूप से 8दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है, जो 500सालों बाद हो रहा है, जिससे इस पर्व की महत्वपूर्णता और बढ़ गई है। भक्तों के लिए यह अवसर आत्मिक शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में चार प्रहरों में विशेष पूजा करते हैं। निशीथ काल में की गई पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है।
निशीथ काल का मुहूर्त
निशीथ काल पूजा का सबसे शुभ समय 16फरवरी को रात 12:09बजे से 1:01बजे तक है। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक और जप करना विशेष लाभ प्रदान करता है।
चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर रात्रि को चार प्रहरों में बांटा जाता है, और प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग पूजा की जाती है। दिल्ली के लिए मुहूर्त इस प्रकार हैं:
प्रथम प्रहर:15फरवरी को शाम 6:11बजे से रात 9:23बजे तक
द्वितीय प्रहर:15फरवरी को रात 9:23बजे से 16फरवरी को 12:35बजे तक
तृतीय प्रहर: 16फरवरी को रात 12:35बजे से सुबह 3:47बजे तक
चतुर्थ प्रहर: 16फरवरी को सुबह 3:47बजे से 6:59बजे तक
महाशिवरात्रि की पूजन विधि
1. सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. शिव मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करें।
3. पूजा सामग्री जैसे दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा, फल, सफेद फूल, भांग, अगरबत्ती और दीपक तैयार रखें।
4. प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करें: जल, दूध, दही, घी और शहद से।
5. 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें, कम से कम 108बार।
6. आरती उतारें और भोग लगाएं, जिसमें फल और मिठाई शामिल हों।
7. रात्रि जागरण करें और शिव कथा सुनें या पढ़ें।
8. अगले दिन पारण समय (सुबह 6:59 बजे के बाद) में व्रत खोलें।
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