
नई दिल्ली: समोसे का नाम सुनते ही बच्चें हो या बड़े सभी के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। लगभग हर भारतीय घर में समोसा बड़े चाव से खाया जाता है। देश के सबसे फेमस स्ट्रीट फूड में से एक समोसा है। समोसा के चाहने वालों की वजह से ही हर साल 5 सितंबर को विश्व समोसा डे मनाया जाता है। लेकिन एक ऐसा भी देश है जहां समोसे को बेन कर दिया गया है।
बता दें कि भारत से लेकर पाकिस्तान,बांग्लादेश और नेपाल समेत कई और देशों में समोसे को लोग खूब पसंद करते है। हम भारतीयों को चाय के साथ अगर कोई स्नैक सबसे ज्यादा पसंद है, तो वो समोसा ही है। भारतीय समोसे को जहां यूरोपियन देशों तक में पसंद किया जा रहा है, वहीं अफ्रीकी देश सोमालिया में समोसा खाने पर पाबंदी लगी है। इस देश में समोसा बनाने, खरीदने और खाने पर लोगों को सज़ा भी दी जाती है। इसकी वजह है समोसा का तिकोना आकार. सोमालिया का एक चरमपंथी समूह मानता है कि समोसे का तिकोना रूप क्रिश्चियन कम्यूनिटी के एक चिह्न से मिलता-जुलता है। यही वजह है कि सोमालिया में समोसे पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालत ये है कि सोमालिया में समोसा बनाने, खरीदने और खाने पर भी सजा का प्रावधान है। कई रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि समोसे में सड़े-गले मीट को भरने की वजह से इस पर पाबंदी लगाई गई।
कहां से आया समोसा
दरअसल, कहा जाता है कि भारत में फ्राइड फूड का अहस हिस्सा बन चुका समोसा ईरान से यहां आया है। ईरान से भारत आया समोसा, भारतीय स्वाद में घुल-मिल गया है। रेहड़ी एवं फुटपाथ से लेकर बड़े-बड़े होटलों की दहलीज पर इतराने लगा। हर भारतीय घर के स्वाद में चटखारे मारने लगा। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के दिल का अजीज पकवान बन गया।
वहीं ऐसा कहा जाता है कि फारसी भाषा के संबोसाग से निकला हुआ शब्द है समोसा। कुछ इतिहासकारों की माने तो गजनवी साम्राज्य के शाही दरबार में एक नमकीन पेस्ट्री परोसी जाती थी और इस पेस्ट्री को मीट कीमा और सुखा मेवा भरकर बनाया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार भारत देश में 2000 साल पहले समोसा आया, जब आर्य भारत आए थे।
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