RAKSHA BANDHAN 2022: कहां से शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार, जानें इसकी पौराणिक कथाएं

RAKSHA BANDHAN 2022: कहां से शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार, जानें इसकी पौराणिक कथाएं

नई दिल्ली: देश में रक्षाबंधन का त्योहार 11 अगस्त को मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और भद्रा रहित काल में मनाए जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती है और उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती है। इसके बदले में भाई बहनों को उपहार के साथ हमेशा उसकी रक्षा का वचन देता है। वहीं इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 11 अगस्त , गुरुवार के दिन पूर्वाह्न 10 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर उसके अगले दिन 12 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी। इसके अलावा रक्षाबंधन को लेकर काफी सारी पौराणिक कथा है। जिसके बाद मे आज हम आपको बताएंगे।

पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के दानवीर राजा बलि ने सौ यज्ञ पूरे करने का प्रण लिया था। यदि राजा बलि के सौ यज्ञ पूरे हो जाते तो वो तीनों लोकों के स्वामी बन जाते। इससे देवतागण चिंतित थे। घबराकर देवराज इन्द्र ने भगवान विष्णु से राजा बलि को यज्ञ पूरा करने से रोकने की प्रार्थना की। देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान विष्णु वामन अवतार लिया। ब्राह्माण वेश धारण कर भगवान राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंच गए। जब राज बलि ने ब्राह्माण बने श्री विष्णु से कुछ माँगने को कहां तो उन्होंने भिक्षा में तीन पग भूमि मांग ली। राजा बलि अपनी दानप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे।  उन्होंने वामन वेश में भगवान को तीन पग भूमि दान में देते हुए कहा कि आप अपने तीन पग से भूमि नाप ले।

भगवान ने एक पग से स्वर्ग ओर दूसरे पग से पृ्थ्वी को नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए भूमि शेष नहीं रही बलि ने अपना सिर भगवान के आगे कर दिया और कहां तीसरा पग आप मेरे सिर पर रख दीजिए। भगवान श्री विष्णु के पैर रखते ही राजा बलि पाताल लोक पहुंच गए। बलि के वचन का पालन करने पर भगवान विष्णु अत्यन्त खुश हुए। उन्होंने राजा बलि को कुछ मांगने के लिए कहा। बलि ने भगवान से सदैव अपने सामने रहने का वचन मांग लिया। भगवान विष्णु अपने वचन का पालन करते हुए राजा बलि के द्वारपाल बन गए।

जब यह बात लक्ष्मी जी को पता चली तो उन्होंने नारद मुनि को बुलाया और इस समस्या का समाधान पूछा। नारद जी ने उन्हें उपाय बताया की आप राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना ले और उपहार में अपने पति भगवन विष्णु को मांग ले। लक्ष्मी जी ने ऐसा ही किया उन्होंने राजा बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया और जब राजा बलि ने उनसे उपहार मांगने को कहा तो उन्होंने अपने पति विष्णु को उपहार में मांग लिया।

इन्द्राणी ने पति इन्द्र को बांधा था रक्षासूत्र

एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ, जो कई दिनों तक चलता रहा। जिसमे की देवताओं की हार होने लगी, यह सब देखकर देवराज इंद्र बड़े निराश हुए तब इंद्र की पत्नी शचि ने विधान पूर्वक एक रक्षासूत्र तैयार किया और श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को ब्राह्मणो द्वारा देवराज इंद्र के हाथ पर बंधवाया जिसके प्रभाव से इंद्र युद्ध में विजयी हुए।

द्रौपदी ने बांधी भगवान श्रीकृष्ण को राखी

महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने जब सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया, तब शिशुपाल का सिर काटने के बाद जब चक्र वापस कृष्ण के पास आया तो उस समय कृष्ण की उंगली कट गई और भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त बहने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साडी़ का किनारा फाड़ कर कृष्ण की उंगली में बांध दिया।

कृष्ण ने तब द्रौपदी को सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दिया। भगवान कृष्ण द्रौपदी को अपनी बहन मानते थे। तभी से रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाईयों को राखी बांधती हैं और भाई उसकी रक्षा करने का वचन देता है।

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